मल्हार अध्याय 4 ‘है’ और ‘हैं’ का उपयोग

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए— • विशेष आश्चर्य का विषय यह है कि यहाँ केवल गंगा जी ही देवता हैं, दूसरा देवता नहीं। • यों तो वैरागियों ने मठ मंदिर कई बना लिए हैं। आप जानते ही हैं कि एकवचन संज्ञा शब्दों के साथ ‘है’ का प्रयोग किया जाता है और बहुवचन संज्ञा शब्दों के साथ ‘हैं’ का। सोचिए, ‘गंगा’ शब्द एकवचन है, फिर भी इसके साथ ‘हैं’ क्यों लिखा गया है?
उत्तर

क्योंकि यहाँ ‘हैं’ बहुवचन नहीं, आदर बता रहा है। इसे आदरार्थ बहुवचन कहते हैं — जब हम किसी एक व्यक्ति या पूज्य वस्तु का आदर करना चाहते हैं, तब उसे एकवचन होते हुए भी बहुवचन की तरह लिखते-बोलते हैं।

वाक्यसंज्ञाक्रिया‘हैं’ क्यों
यहाँ केवल गंगा जी ही देवता हैंगंगा (एकवचन)हैंआदरार्थ बहुवचन — गंगा को देवी/माता मानकर आदर दिया गया
वैरागियों ने मठ मंदिर कई बना लिए हैंमठ मंदिर (कई)हैंयह सचमुच का बहुवचन है — गिनती में एक से अधिक
दोनों ‘हैं’ एक जैसे दिखते हैं, पर कारण अलग हैं। पहले में ‘हैं’ का कारण आदर है, दूसरे में संख्या। यही इस गतिविधि की मूल बात है — क्रिया देखकर यह मत मान लीजिए कि संज्ञा एक से अधिक है; पहले देखिए कि वह संज्ञा आदरणीय तो नहीं।

पहचानने के दो सहारे —

  • ‘जी’, ‘श्री’, ‘साहब’, ‘महाशय’, ‘महोदय’ जैसा कोई आदर-सूचक शब्द साथ लगा हो, तो प्रायः आदरार्थ बहुवचन होता है — “श्री गंगा जी”, “डाकिया जी”, “डॉक्टर साहब”।
  • संज्ञा के साथ आने वाले सर्वनाम भी बदल जाते हैं — वह → वे, उसका → उनका, उससे → उनसे। जैसे — “पिता जी सो रहे हैं, उन्हें मत जगाओ।”

पुस्तक के अपने उदाहरण — “मेरे पिता जी सो रहे हैं।”, “भारत के प्रधानमंत्री भाषण दे रहे हैं।” दोनों में व्यक्ति एक ही है, फिर भी क्रिया बहुवचन में है।

प्र2.
अब ‘आदरार्थ बहुवचन’ को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए— 1. प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं ________, वे अभी सभा में उपस्थित ________। 2. माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते ________, हमें उनका कहना मानना चाहिए। 3. मेरी बहन बाजार जा रही ________ वहाँ से किताबें ले आएगी। 4. बाहर फेरीवाला ________ ________। ________ बुला लाओ। 5. डाकिया जी आए ________। उन्हें भी बुला लाओ। 6. आप तो बहुत दिन बाद ________, ________ का स्वागत है। 7. डॉक्टर साहब बहुत विद्वान ________, ________ से परामर्श लेना चाहिए। 8. आपके माता-पिता कहाँ ________? क्या मैं ________ से मिल सकता हूँ? 9. ये हमारे हिंदी के अध्यापक ________, हम ________ से बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं। 10. बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर ________ ________।
उत्तर

पूरे वाक्य इस प्रकार बनेंगे —

क्रमपूरा वाक्ययह रूप क्यों
1.प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं हैं, वे अभी सभा में उपस्थित हैंएक ही व्यक्ति, पर ‘जी’ लगा है और आगे ‘वे’ आया है — आदरार्थ बहुवचन।
2.माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं, हमें उनका कहना मानना चाहिए।‘माता-पिता’ स्वयं दो व्यक्ति हैं — यह सामान्य बहुवचन है, आदरार्थ नहीं।
3.मेरी बहन बाजार जा रही है, वहाँ से किताबें ले आएगी।अपने से छोटे या बराबर के लिए सामान्यतः एकवचन — इसलिए ‘है’। आगे ‘आएगी’ भी एकवचन है, यही सुराग है।
4.बाहर फेरीवाला आया हैउसे बुला लाओ।परिचित नहीं, कोई आदर-सूचक शब्द नहीं — इसलिए एकवचन और सर्वनाम ‘उसे’।
5.डाकिया जी आए हैं। उन्हें भी बुला लाओ।‘जी’ और आगे ‘उन्हें’ — दोनों आदर के संकेत, इसलिए ‘हैं’। (यहीं वाक्य 4 से तुलना कीजिए।)
6.आप तो बहुत दिन बाद आए हैं, आपका स्वागत है।‘आप’ स्वयं आदर-सूचक सर्वनाम है, इसलिए क्रिया सदा बहुवचन में — ‘आया है’ कभी नहीं।
7.डॉक्टर साहब बहुत विद्वान हैं, उनसे परामर्श लेना चाहिए।‘साहब’ आदर-सूचक है, इसलिए ‘हैं’ और ‘उनसे’।
8.आपके माता-पिता कहाँ हैं? क्या मैं उनसे मिल सकता हूँ?संख्या से भी बहुवचन और आदर से भी — दोनों कारण एक साथ।
9.ये हमारे हिंदी के अध्यापक हैं, हम इनसे बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं।‘ये’ से वाक्य शुरू हुआ है, इसलिए आगे ‘इनसे’ ही आएगा — ‘उनसे’ नहीं। पास वाले के लिए ये/इनसे, दूर वाले के लिए वे/उनसे।
10.बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर रहा हैपशु के लिए आदरार्थ बहुवचन नहीं लगाया जाता — इसलिए ‘रहा है’।
इस अभ्यास का असली पाठ: वाक्य 4 और 5 को साथ रखकर देखिए — “फेरीवाला आया है” पर “डाकिया जी आए हैं”। दोनों एक ही व्यक्ति-जैसे पद हैं, अंतर केवल ‘जी’ का है। यानी आदर व्याकरण में भी दिखता है, केवल व्यवहार में नहीं।
सावधानी: आदरार्थ बहुवचन में क्रिया के साथ-साथ सर्वनाम और विशेषण भी बदलते हैं — वह→वे, उसे→उन्हें, उसका→उनका, यह→ये, इसे→इन्हें। आधा बदलकर आधा छोड़ देना (जैसे “डाकिया जी आए हैं, उसे बुला लाओ”) अशुद्ध है।
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