संवाद लिखने के नियम: बोलने वाले का नाम बाईं ओर, उसके बाद निशान (:), फिर उसकी बात। हर वक्ता की बात नई पंक्ति से। बातचीत छोटी-छोटी हो, भाषण न बने। और यहाँ एक बात और — संवाद में पाठ की सामग्री आनी चाहिए, तभी वह इसी पाठ का संवाद लगेगा।
नमूना उत्तर
भारतेंदु: कल्लू जी, आज सवेरे घाट पर आपको देखा नहीं। कहाँ रह गए थे?
कल्लू जी: मैं नील धारा की ओर निकल गया था। सोचिए तो — एक ही गंगा जी यहाँ दो धाराओं में बँट जाती हैं, और बीच में एक नीचा-सा हरा पर्वत खड़ा है।
भारतेंदु: मैंने भी वही देखा। और उस छोटे चुटीला पर्वत के शिखर पर चण्डिका देवी की मूर्ति है, यह आपने देखी?
कल्लू जी: देखी। पर मुझे सबसे विचित्र यह लगा कि इतने बड़े तीर्थ में देवता केवल गंगा जी ही हैं, दूसरा कोई नहीं।
भारतेंदु: यही तो इसकी विशेषता है। और यहाँ के लोग देखिए — पंडे तक एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं। इतना संतोष मैंने कहीं नहीं देखा।
कल्लू जी: सच कहा। कल आपने तट पर पत्थर पर बैठकर जो भोजन कराया था, वह स्वाद अब तक याद है। जल के ठंडे छींटे बार-बार मुँह पर आ रहे थे।
भारतेंदु: मुझे भी लगा कि सोने की थाल में खाया हुआ भोजन भी उस सुख के आगे फीका है।
कल्लू जी: तो अब क्या सोचा है? कब तक ठहरेंगे?
भारतेंदु: लौटना तो पड़ेगा, कल्लू जी। पर सच पूछिए तो चित्त से मैं यहीं रह जाऊँगा। संपादक महोदय को यही सब लिखकर भेजूँगा।
कल्लू जी: अवश्य लिखिए। जो लोग यहाँ नहीं आ सकते, वे आपके पत्र से ही यह आनंद पा लेंगे।