सही उत्तर — लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।
| विकल्प | सही / गलत | कारण |
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| सज्जन लोग बिना पूछे रसीले फल देते हैं | गलत | वाक्य का विषय मनुष्य नहीं, वृक्ष हैं। ‘पत्थर मारने’ की बात मनुष्यों पर लागू ही नहीं होती। |
| फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त करना | सही ★ | वृक्ष पर पत्थर मारो तो भी वह बदले में फल ही देता है — यही सज्जन का स्वभाव है। निर्जीव वृक्ष को सज्जन मनुष्य का गुण देना मानवीकरण कहलाता है। |
| हरिद्वार के सभी दुकानदार सज्जन थे | गलत | दुकानदारों की चर्चा बहुत बाद में आती है — “पंडे दुकानदार इत्यादि कनखल व ज्वालापुर से आते हैं।” इस वाक्य से उसका कोई संबंध नहीं। |
| लेखक को पत्थर मारकर फल तोड़ना पसंद था | गलत | यह वाक्य का शब्दशः, सतही अर्थ है। पूरा अनुच्छेद वृक्षों की परोपकार-वृत्ति की प्रशंसा कर रहा है, लेखक की आदत नहीं बता रहा। |