प्र1.
(क) पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं— एक सही और एक भ्रामक। अपने समूह में इन पर विचार कीजिए और उपयुक्त निष्कर्ष पर सही का चिह्न लगाइए।
1. पर्वतों पर अनेक प्रकार की वल्ली हरी-भरी सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है।
2. बड़े-बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं।
3. इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।
4. जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिष्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है।
5. एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।
6. निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।
उत्तर
छहों वाक्यों के सही निष्कर्ष और यह भी कि दूसरा निष्कर्ष क्यों भ्रामक है —
| क्रम | सही निष्कर्ष (✓) | दूसरा निष्कर्ष भ्रामक क्यों है |
|---|---|---|
| 1. | लताओं का फैलना सज्जनों की शुभ इच्छाओं की तरह सौम्यता और सुंदरता को दर्शाता है। | दूसरा निष्कर्ष तुलना को उलट देता है। लेखक लताओं की बात कर रहे हैं और सज्जनों के मनोरथ केवल उपमान हैं — यानी जिससे तुलना की गई। “सज्जनों की शुभ इच्छाएँ लताओं के समान फैल जाती हैं” कहने पर विषय बदलकर सज्जन हो जाते हैं, जो वाक्य में है ही नहीं। |
| 2. | वृक्षों की स्थिति साधुओं जैसी है जो हर मौसम को सहते हुए तपस्या करते हैं। | दूसरे में ‘विवश हैं’ शब्द है — यही गड़बड़ है। साधु मौसम सहने को मजबूर नहीं होता, वह स्वेच्छा से सहता है; इसी को तपस्या कहते हैं। ‘विवश’ कहते ही प्रशंसा दया में बदल जाती है और लेखक का भाव नष्ट हो जाता है। |
| 3. | यहाँ के पक्षी प्रकृति में सुरक्षित अनुभव करते हैं, इसलिए वे निडर होकर कल्लोल करते हैं। | दूसरा कहता है कि पक्षी डरकर यहाँ आए हैं — पर वाक्य में शब्द ‘निडर’ है। वे नगर के बधिकों (शिकारियों) से डरकर नहीं भागे, बल्कि यहाँ उनका डर ही समाप्त हो गया है। हरिद्वार की विशेषता बताना यहाँ लेखक का उद्देश्य है। |
| 4. | गंगाजल की ठंडक और मिठास का अनुभव बहुत मनोहारी है। | दूसरा निष्कर्ष कल्पना को तथ्य समझ लेता है। “मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है” एक कल्पना है (मानो = जैसे); इसका अर्थ यह नहीं कि गंगाजल से सचमुच शक्कर और बर्फ बनाई जा सकती है। |
| 5. | लेखक ने गंगा के समीप बैठकर भोजन किया, जिससे उनकी प्रकृति से निकटता झलकती है। | दूसरा निष्कर्ष पाठ से टकराता है — पाठ कहता है “जल यहाँ का अत्यंत शीतल है” और “जल के छलके पास ही ठंढे-ठंढे आते थे।” गंगा का पानी गरम था, यह पाठ के विरुद्ध है। |
| 6. | लेखक चाहता है कि पत्र को महत्व देकर प्रकाशित किया जाए। | दूसरा ‘स्थानदान’ का शब्दशः अर्थ ‘कहीं जगह देना’ लगा लेता है। पर पत्र संपादक को लिखा गया है, इसलिए यहाँ ‘स्थान’ का अर्थ है — पत्रिका के पन्नों में जगह, अर्थात् छापना। |
इन छहों में एक ही जाल है: भ्रामक निष्कर्ष हर बार या तो तुलना को उलट देता है, या ‘मानो/जैसे’ की कल्पना को सचाई मान लेता है, या एक शब्द (निडर, विवश, स्थानदान) का अर्थ बदल देता है। इसलिए ऐसा प्रश्न हल करते समय वाक्य का मुख्य कर्ता और एक-एक शब्द दोनों जाँचिए।