प्र1.
नीचे दिए गए स्थानों में ‘हरिद्वार’ से जुड़े शब्द अपने मन से या पाठ से चुनकर लिखिए— (शब्द-जाल के बीच में ‘हरिद्वार’ लिखा है और उसके चारों ओर सात रिक्त खाने दिए गए हैं।)
उत्तर
बीच में ‘हरिद्वार’ है; सातों खानों में पाठ से चुने हुए शब्द भरिए। एक भरा हुआ नमूना —
| खाने में लिखिए | पाठ में यह कहाँ है / यह हरिद्वार से कैसे जुड़ा है |
|---|---|
| गंगा | “एक ओर त्रिभुवन पावनी श्री गंगा जी की पवित्र धारा बहती है” — हरिद्वार की पहचान ही गंगा है। |
| हरि की पैड़ी | “यहाँ हरि की पैड़ी नामक एक पक्का घाट है और यहीं स्नान भी होता है।” |
| नील धारा | “श्री गंगा जी दो धारा हो गई हैं— एक का नाम नील धारा…” |
| कनखल | पाँच मुख्य तीर्थों में से एक — “यह कनखल तीर्थ बड़ा उत्तम है।” |
| विल्वपर्वत | “विल्व पर्वत भी पास ही एक सुहाना पर्वत है जिस पर विल्वेश्वर महादेव की मूर्ति है।” |
| कुशा | “यहाँ की कुशा सबसे विलक्षण होती है” — यहाँ की घास तक सुगंधित है। |
| धर्मशाला | “तट पर राजाओं की धर्मशाला यात्रियों के उतरने के हेतु बनी हैं।” |
और भी शब्द जो भरे जा सकते हैं — कुशावर्त्त, ज्वालापुर, चण्डिका देवी, पंडे, घाट, तीर्थ, स्नान, जनेऊ, वैरागी, दुकानें, ग्रहण, भागवत, पर्वत, हरियाली।
ऐसा शब्द-जाल बनाते समय एक बात का ध्यान रखिए: सभी सात शब्द एक ही तरह के न हों। अच्छा शब्द-जाल वह है जिसमें अलग-अलग श्रेणियाँ आएँ — स्थान (कनखल, ज्वालापुर), प्रकृति (गंगा, विल्वपर्वत, कुशा), लोग (पंडे, वैरागी, यात्री) और कर्म (स्नान, पारायण)। इससे यह भी दिख जाता है कि हरिद्वार क्या-क्या है।