यह वाक्य क्या दर्शाता है: लेखक शरीर से हरिद्वार से लौट आए हैं, पर मन से नहीं लौटे। ‘चित्त’ का अर्थ है मन और ‘निवास करना’ का अर्थ है रहना — यानी “मेरा शरीर लौट आया, मन वहीं रह गया।” यह वाक्य तीन बातें एक साथ कहता है —
- अनुभव की गहराई — जो जगह केवल अच्छी लगती है, वह याद रहती है; जो जगह भीतर तक छू जाती है, वह मन में बस जाती है।
- वर्णन की सचाई — पत्र में जो लिखा गया है वह सुनी-सुनाई बात नहीं, अब तक जिया जा रहा अनुभव है।
- पत्र का उपसंहार — इसके तुरंत बाद लेखक कहते हैं कि अब वे “मौनावलंबन” करते हैं, यानी चुप हो जाते हैं। जो कहा नहीं जा सकता, उसके आगे चुप हो जाना ही ठीक है।
नमूना उत्तर (अपना अनुभव): पिछली गर्मियों में मैं अपनी नानी के गाँव गया था। लौटने के बाद कई दिनों तक कक्षा में बैठे-बैठे मुझे वहीं का आँगन, नीम का पेड़ और शाम को तालाब की ओर जाती पगडंडी याद आती रही। रात को छत पर लेटते ही लगता कि मैं गाँव की चारपाई पर हूँ। तभी मुझे समझ आया कि किसी जगह से लौट आना और उसे छोड़ देना — ये दो अलग बातें हैं।