प्र1.
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्ति के बारे में बताइए।
उत्तर
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इसलिए उत्तर आपका ही होना चाहिए। पर अच्छा उत्तर बनाने के लिए इन चार बातों को क्रम से रखिए —
- वह व्यक्ति कौन है और आपसे उसका क्या संबंध है।
- कौन-सी एक ठोस घटना — कब, कहाँ, क्या हुआ। सामान्य बातें (“वे बहुत अच्छे हैं”) उत्तर को कमज़ोर करती हैं।
- उन्होंने क्या कहा या किया, और उससे आपमें क्या बदला।
- दोहे से जोड़ - वे आपके लिए किस अर्थ में ‘गुरु’ हैं।
नमूना उत्तर: “छठी कक्षा में मैं गणित से इतना डरता था कि प्रश्न देखते ही कॉपी बंद कर देता था। हमारे शिक्षक श्री रमेश जी ने एक दिन मुझे रोककर कहा — ‘उत्तर मत सोचो, पहला कदम सोचो।’ फिर उन्होंने रोज़ भोजनावकाश के दस मिनट मुझे केवल पहला कदम लिखवाना सिखाया। तीन महीने बाद मैं पूरा प्रश्न स्वयं हल करने लगा। उन्होंने मुझे गणित नहीं सिखाया था — उन्होंने डर के सामने खड़ा होना सिखाया था। मेरे लिए वे ही कबीर वाले गुरु हैं, क्योंकि रास्ता उन्होंने ही दिखाया।”
ध्यान दीजिए: ‘गुरु’ केवल विद्यालय का शिक्षक नहीं होता। माता-पिता, दादी, कोई कारीगर, कोई खिलाड़ी-प्रशिक्षक या कोई पुस्तक भी उस काम की गुरु हो सकती है जो उसने सिखाया।