प्र1.
अब आप ऐसी अन्य कहावतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर
पहले याद रखिए कि पुस्तक ने कहावत की परिभाषा दे दी है — ‘ऐसे वाक्य जिन्हें लोग अपनी बात को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं; इनमें जीवन के गहरे अनुभव को सरल और संक्षेप में बता दिया जाता है।’ कहावत वाक्य में तभी जँचती है जब उसके पहले घटना हो और कहावत उस घटना का निचोड़ बने।
| कहावत | अर्थ | वाक्य |
|---|---|---|
| जैसा संग वैसा रंग | व्यक्ति अपनी संगति जैसा बन जाता है | पहले वह पढ़ाई से भागता था, पर अच्छे साथी मिलते ही रोज़ पुस्तकालय जाने लगा — जैसा संग वैसा रंग। |
| अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत | समय निकल जाने पर पछताना बेकार है | परीक्षा के एक दिन पहले पूरी पुस्तक खोलकर बैठने से क्या होगा — अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत। |
| दूर के ढोल सुहावने | दूर से हर चीज़ अच्छी लगती है, पास जाकर सच्चाई पता चलती है | शहर के विद्यालय की चर्चा सुनकर वह उत्साहित था, पर वहाँ पहुँचकर बोला — दूर के ढोल सुहावने। |
| एक हाथ से ताली नहीं बजती | झगड़े में दोनों पक्षों का हाथ होता है | शिक्षक ने दोनों को समझाया कि केवल एक को दोष नहीं दिया जा सकता, एक हाथ से ताली नहीं बजती। |
| नाच न जाने आँगन टेढ़ा | अपनी कमी छिपाने के लिए बहाना बनाना | वह हर बार कहता है कि कलम ठीक नहीं है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा। |
| बूँद-बूँद से घड़ा भरता है | छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़ा परिणाम देते हैं | रोज़ दस शब्द याद करते-करते उसकी अंग्रेज़ी अच्छी हो गई — बूँद-बूँद से घड़ा भरता है। |
कबीर के दोहे कहावत क्यों बन गए: उनमें तीनों बातें एक साथ हैं — छोटा आकार (दो पंक्तियाँ), लय (जो याद रखने में मदद करती है) और रोज़ की चीज़ों से बना चित्र (खजूर, सूप, पंछी)। इसीलिए ‘जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय’ लोगों की ज़बान पर चढ़कर ‘जैसा संग वैसा रंग’ बन गया।