प्र1.
(क) दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें— (1) एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले (जैसे— राजा, रस्सी, रात) दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं।
उत्तर
पाठ में ऐसी कई पंक्तियाँ हैं —
- “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।”
- “बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥”
- “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।”
- “बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय॥”
- “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।”
- “सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय॥”
- “जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय॥”
यह क्या है: एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति को अनुप्रास अलंकार कहते हैं। इसका काम केवल सजावट नहीं है — दोहराई गई ध्वनि पंक्ति को गाने लायक बना देती है। कबीर के दोहे लिखकर नहीं, गा-गाकर फैले थे; ‘निंदक नियरे’ या ‘सार सार’ जैसी ध्वनियाँ ही उन्हें कान में टिकाए रखती हैं।