प्र1.
(क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं। वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए।
उत्तर
कबीर का ढंग याद रखिए — वे उन्हीं बातों पर लिखते थे जो रोज़ दिखती हैं और जिनमें दिखावा या असंतुलन हो। उसी कसौटी पर आज के विषय होंगे —
- मोबाइल और स्क्रीन की अति — ‘अति का भला न’ का सीधा विस्तार।
- अफ़वाह और झूठी ख़बर — बिना जाँचे आगे भेज देना; ‘साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय’ यहीं काम आता है।
- दिखावे की चमक — फ़ोटो में सुखी दिखना और भीतर बेचैन रहना।
- पानी और पेड़ों की बरबादी — नदी, कुआँ, कटते जंगल।
- कचरा और प्लास्टिक — खरीदने-फेंकने की अति।
- जाति, धर्म और भाषा के भेद — कबीर का सबसे पुराना और सबसे ज़रूरी विषय।
- परीक्षा और अंकों का दबाव — बच्चों के मन पर बोझ।
- बुज़ुर्गों का अकेलापन — घर भरे हुए, पर बात करने वाला कोई नहीं।
- ऑनलाइन गाली-गलौज — ‘ऐसी बानी बोलिए’ का आज का मैदान।
सूची बनाते समय कसौटी: ऐसा विषय चुनिए जिसमें कोई रोज़ की चीज़ उदाहरण बन सके — मोबाइल, बोतल, पंखा, नल। कबीर की ताकत बड़े विचार में नहीं, छोटी चीज़ को उदाहरण बना देने में थी।