मल्हार अध्याय 5 कबीर हमारे समय में

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं। वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए।
उत्तर

कबीर का ढंग याद रखिए — वे उन्हीं बातों पर लिखते थे जो रोज़ दिखती हैं और जिनमें दिखावा या असंतुलन हो। उसी कसौटी पर आज के विषय होंगे —

  • मोबाइल और स्क्रीन की अति — ‘अति का भला न’ का सीधा विस्तार।
  • अफ़वाह और झूठी ख़बर — बिना जाँचे आगे भेज देना; ‘साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय’ यहीं काम आता है।
  • दिखावे की चमक — फ़ोटो में सुखी दिखना और भीतर बेचैन रहना।
  • पानी और पेड़ों की बरबादी — नदी, कुआँ, कटते जंगल।
  • कचरा और प्लास्टिक — खरीदने-फेंकने की अति।
  • जाति, धर्म और भाषा के भेद — कबीर का सबसे पुराना और सबसे ज़रूरी विषय।
  • परीक्षा और अंकों का दबाव — बच्चों के मन पर बोझ।
  • बुज़ुर्गों का अकेलापन — घर भरे हुए, पर बात करने वाला कोई नहीं।
  • ऑनलाइन गाली-गलौज — ‘ऐसी बानी बोलिए’ का आज का मैदान।
सूची बनाते समय कसौटी: ऐसा विषय चुनिए जिसमें कोई रोज़ की चीज़ उदाहरण बन सके — मोबाइल, बोतल, पंखा, नल। कबीर की ताकत बड़े विचार में नहीं, छोटी चीज़ को उदाहरण बना देने में थी।
प्र2.
(ख) इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर

दोहे की तरह लिखने के लिए दो नियम पर्याप्त हैं: (1) दोनों पंक्तियों का अंत मिलती-जुलती ध्वनि पर हो, और (2) पहली पंक्ति बात कहे, दूसरी उसका कारण या उदाहरण दे।

मोबाइल पर —
हाथ भरा है यंत्र से, आँख भरी है धूल।
पास बिठाकर भूलना, यही समय की भूल॥

झूठी ख़बर पर —
सुनी बात को तोलिए, फिर आगे बढ़ जाय।
बिन परखे जो बाँटता, सो भी दोषी थाय॥

पानी पर —
नल टपकै दिन-रात भर, बूँद-बूँद बह जाय।
प्यासे को जब खोजिए, कुआँ नहीं मिल पाय॥

पेड़ पर —
छाया माँगे हर कोई, पौधा रोपे कौन।
जो बोवै सो पावई, बाकी बैठे मौन॥

भेदभाव पर —
एक हवा सब साँस लें, एक धरा सब गाँव।
ऊँच-नीच की बात क्यों, एक-सी सबकी छाँव॥
अपनी पंक्तियाँ लिखते समय: पहले तुक वाले शब्दों की जोड़ी सोच लीजिए (भूल–धूल, जाय–पाय, कौन–मौन), फिर उनके चारों ओर पंक्ति बनाइए। शुरुआत में तुक ठीक न मिले तो चिंता मत कीजिए — बात का साफ़ होना तुक से अधिक ज़रूरी है।
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