मल्हार अध्याय 5 खोजबीन के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से कबीर के भजनों, गीतों, लोकगीतों को खोजिए और सुनिए। किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए। (पुस्तक में NCERT OFFICIAL यूट्यूब चैनल की कड़ियाँ दी गई हैं — संत कबीर, कबीर वाणी, कबीर की साखियाँ, तथा ‘दोहे — कबीर, रहीम, तुलसी’।)
उत्तर

यह खोजबीन की गतिविधि है। इसे व्यवस्थित ढंग से कीजिए —

चरण 1 — कहाँ खोजें। दादी-नानी और घर के बुज़ुर्ग सबसे अच्छे स्रोत हैं, क्योंकि कबीर के पद अक्सर लिखित नहीं, सुनकर सीखे हुए मिलते हैं। इसके बाद विद्यालय का पुस्तकालय (कबीर ग्रंथावली, कबीर वचनावली) और फिर पुस्तक में दी गई NCERT OFFICIAL की कड़ियाँ।

चरण 2 — किन प्रसिद्ध पदों से शुरू करें। इनकी पहली पंक्तियाँ खोज में सहायक होंगी —

  • “मोको कहाँ ढूँढ़े रे बंदे, मैं तो तेरे पास में।”
  • “झीनी झीनी बीनी चदरिया।”
  • “मन लागो मेरो यार फकीरी में।”
  • “रहना नहिं देस बिराना है।”

पूरा पद पुस्तक या रिकॉर्डिंग से मिलाकर ही लिखिए — सुनी हुई पंक्तियों में अक्सर पाठ-भेद होता है।

चरण 3 — लेखन-पुस्तिका में क्या-क्या लिखें। केवल गीत मत लिखिए; उसके साथ ये भी दर्ज कीजिए —

क्या लिखेंउदाहरण
गीत/पद का पूरा पाठजैसा सुना या पढ़ा, ज्यों का त्यों
स्रोतकिससे सुना / किस पुस्तक या कड़ी से लिया
कठिन शब्दों के अर्थजैसे — चदरिया = शरीर; बिराना = पराया
दो पंक्तियों में भावपद क्या कहना चाहता है
गायन शैलीभजन, निर्गुण, लोकगीत — जैसा सुना

चरण 4 — पुस्तिका। सभी समूहों के पन्ने इकट्ठा कीजिए, विषय के अनुसार क्रम लगाइए (गुरु, सत्य, संगति, वाणी), आरंभ में विषय-सूची और अंत में स्रोतों की सूची जोड़िए, फिर उसे कक्षा-पुस्तकालय में रखिए।

यह गतिविधि क्यों: कबीर की रचनाएँ छपने से पहले सैकड़ों वर्ष गाकर ही एक पीढ़ी से दूसरी तक पहुँचीं। घर के बुज़ुर्गों से पद इकट्ठा करके आप उसी परंपरा की अगली कड़ी बन रहे हैं — और यह किसी वेबसाइट से नकल कर लेने से कहीं अधिक मूल्यवान है।
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