★ गुरु का महत्व — यही मुख्य उत्तर है। ★ ज्ञान का महत्व भी लिया जा सकता है, क्योंकि गुरु का बड़प्पन उनके दिए ज्ञान से ही बनता है।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥”
भाव — शिष्य के सामने एक ही समय गुरु और गोविंद (ईश्वर) दोनों खड़े हैं। वह उलझन में है — पहले किसके चरण छुए? वह गुरु को चुनता है और कहता है, ‘मैं अपने गुरु पर न्योछावर हूँ, क्योंकि गोविंद का पता तो उन्होंने ही बताया।’
‘श्रम का महत्व’ और ‘भक्ति का महत्व’ ठीक नहीं हैं। दोहे में परिश्रम की चर्चा है ही नहीं, और भक्ति यहाँ विषय नहीं — विषय यह है कि भक्ति तक पहुँचाने वाला कौन है।