प्र1.
(क) पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | स्तंभ 2 (सही अर्थ) | क्यों |
|---|---|---|
| 1. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। | 3. गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और शिष्य गुरु का आदर करते हैं। | शिष्य पहले गुरु के चरण छूता है, क्योंकि गोविंद तक का रास्ता गुरु ने बताया। |
| 2. अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। | 5. जीवन में संतुलन महत्वपूर्ण है। | दोनों अतियाँ — बहुत बोलना और बिलकुल चुप रहना — समान रूप से हानिकारक हैं। |
| 3. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। | 6. हमें मधुर वाणी बोलनी चाहिए जिससे मन को शांति प्राप्त हो सके। | ‘सीतल’ शब्द ही शांति की ओर संकेत करता है — दूसरों की भी, अपनी भी। |
| 4. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। | 8. आलोचकों को अपने पास रखना चाहिए। वे हमें हमारी गलतियाँ बताते हैं। | ‘नियरे’ का अर्थ ही निकट है; ‘कुटी छवाय’ उसे स्थायी रूप से पास बसाना है। |
| 5. साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। | 7. विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है। | सूप सार रखता है और थोथा उड़ाता है — यही पहचानने की शक्ति विवेक है। |
| 6. कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। | 4. मन को नियंत्रित करना और सही दिशा में ले जाना महत्वपूर्ण है। | पंछी की तरह मन जहाँ चाहे उड़ जाता है, इसीलिए उसे दिशा देनी पड़ती है। |
| 7. साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। | 1. सत्य का पालन कठिन है और झूठ पाप के समान है। | सत्य को ‘तप’ कहना ही बताता है कि उसका पालन आसान नहीं। |
| 8. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। | 2. बड़ा होने के साथ व्यक्ति को उदार भी होना चाहिए। | खजूर ऊँचा है पर छाया और फल किसी को नहीं देता — ऊँचाई बिना उदारता व्यर्थ है। |
तरीका: मिलान में पहले वह पंक्ति उठाइए जिसका कोई एक शब्द ही अर्थ खोल देता है — जैसे ‘नियरे’ (निकट) या ‘अति’। ऐसी दो-तीन जोड़ियाँ बन जाने पर बाकी अपने आप छँट जाती हैं।