प्र1.
राजा — “कोऽत्र द्वारि तिष्ठति ?” (पृष्ठ 113)
उत्तर
उत्तरम् — वीरवरः — “सेवको वीरवरोऽत्र द्वारि वर्त्तते देव !”
हिन्दी अर्थ: राजा (आधी रात को) पूछते हैं — “यहाँ द्वार पर कौन खड़ा है?” वीरवर उत्तर देता है — “हे देव! आपका सेवक वीरवर यहाँ द्वार पर है।” कृष्ण-चतुर्दशी की आधी रात में भी वह द्वार छोड़कर नहीं गया — क्योंकि ‘यदा राजा स्वयमादिशति तदा याति स्वगृहम्’ (राजा जब स्वयं आज्ञा दें, तभी वह घर जाता है)।
व्याकरण-सङ्केतः: कोऽत्र = कः + अत्र (विसर्ग-सन्धि)। वीरवरोऽत्र = वीरवरः + अत्र। द्वारि — ‘द्वार’ शब्द का सप्तमी एकवचन (आधार अर्थ में) = ‘द्वार पर’।