दीपकम् अध्याय 10 वयं शब्दार्थान् जानीमः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
मातृभाषया अर्थं लिखत — (सारण्यां प्रदत्तानां पदानाम् अन्तिमः स्तम्भः रिक्तः अस्ति; तत्र स्वमातृभाषया अर्थः लेखनीयः।)
उत्तर

यह स्तम्भ अपनी मातृभाषा में भरना है (हिन्दी, मराठी, बांग्ला, तमिल… जो भी आपकी हो)। नीचे हिन्दी-माध्यम के विद्यार्थियों के लिए पूरी सारणी दी गई है — पहले पुस्तक का संस्कृत-पर्याय, फिर हिन्दी अर्थ।

शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)मातृभाषया (हिन्दी) अर्थः
महीपतिःभूपालःराजा
महापराक्रमीअतिबलशालीबहुत बलवान्
नानाशास्त्रवित्अनेकेषां शास्त्राणां ज्ञाताअनेक शास्त्रों का ज्ञाता
पूतचरित्रःपवित्रं चरित्रं यस्यपवित्र चरित्र वाला
प्रतिवसति स्मअवसत्रहता था
वृत्त्यर्थम्आजीविकां प्राप्तुम्आजीविका पाने के लिए
समायाताःआगतवन्तःआए
प्रतिहारम्द्वारपालम्द्वारपाल को
दौवारिकःद्वारपालकःद्वारपाल
वर्तनम्वेतनम्वेतन
उपपन्नम्उपयुक्तम् / युक्तियुक्तम्उपयुक्त / उचित
सुवर्णशतचतुष्टयम्चतुश्शतसंख्यकाः स्वर्णमुद्राःचार सौ स्वर्णमुद्राएँ
निर्गतःबहिः गतवान्बाहर चला गया
आलोक्यदृष्ट्वादेखकर
नियोजितःसेवायां नियुक्तःनियुक्त
धृतायुधःशस्त्रयुक्तःशस्त्र धारण किए हुए
अहर्निशम्दिवसः रात्रिः चदिन-रात
करुणरोदनध्वनिम्करुणाजनकं रोदनध्वनिम्करुणाजनक क्रन्दन-ध्वनि
व्यचिन्तयत्अचिन्तयत्सोचा
सूचिभेद्येगहनेसघन
तिमिरेअन्धकारेअन्धकार में
पृष्ठतःपृष्ठभागात्पीछे से
निरूपयामिपश्यामिदेखता हूँ
खड्गपाणिःखड्गवान् जनःखड्गधारी
रोदनपरारोदनं कुर्वतीरोती हुई
विलपसिरोदनं करोषिरो रही हो
क्रन्दामिरोदनं करोमिरो रही हूँ
साष्टाङ्गं नमस्कृत्यअष्टभिः अङ्गैः सह प्रणामं कृत्वाआठों अंगों सहित प्रणाम करके
प्रत्युवाचउत्तरं दत्तवतीउत्तर दिया
पञ्चत्वम्मृत्युम्मृत्यु को
अनाथास्वामिनं विनास्वामी के बिना
प्रवृत्तिःआचरणम्आचरण
सुचिरम्दीर्घकालं यावत्दीर्घ काल तक
दुःसाध्याकाठिन्येन अनुपालनीयाकठिनाई से पालन करने योग्य
सहासवदनेनहास्य-युक्त-मुखेनहँसते हुए मुख से
निवत्स्यामिवासं करिष्यामिरहूँगी
तत्क्षणादेवतत्कालम्उसी क्षण
ध्यान दीजिए: ‘उपपन्नम्’ सारणी में दो बार आया है — एक बार ‘उपयुक्तम्’ (Appropriate) और एक बार ‘युक्तियुक्तम्’ (Suitable) अर्थ में। दोनों जगह भाव एक ही है — ‘जो ठीक बैठे’। इसी तरह ‘विलपसि / क्रन्दामि / रोदनपरा’ — तीनों एक ही धातु-भाव (रोना) के अलग-अलग रूप हैं: क्रमशः मध्यमपुरुष एकवचन, उत्तमपुरुष एकवचन और स्त्रीलिङ्ग विशेषण (प्रथमा एकवचन)
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