प्र1.
मातृभाषया अर्थं लिखत — (सारण्यां प्रदत्तानां पदानाम् अन्तिमः स्तम्भः रिक्तः अस्ति; तत्र स्वमातृभाषया अर्थः लेखनीयः।)
उत्तर
यह स्तम्भ अपनी मातृभाषा में भरना है (हिन्दी, मराठी, बांग्ला, तमिल… जो भी आपकी हो)। नीचे हिन्दी-माध्यम के विद्यार्थियों के लिए पूरी सारणी दी गई है — पहले पुस्तक का संस्कृत-पर्याय, फिर हिन्दी अर्थ।
| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | मातृभाषया (हिन्दी) अर्थः |
|---|---|---|
| महीपतिः | भूपालः | राजा |
| महापराक्रमी | अतिबलशाली | बहुत बलवान् |
| नानाशास्त्रवित् | अनेकेषां शास्त्राणां ज्ञाता | अनेक शास्त्रों का ज्ञाता |
| पूतचरित्रः | पवित्रं चरित्रं यस्य | पवित्र चरित्र वाला |
| प्रतिवसति स्म | अवसत् | रहता था |
| वृत्त्यर्थम् | आजीविकां प्राप्तुम् | आजीविका पाने के लिए |
| समायाताः | आगतवन्तः | आए |
| प्रतिहारम् | द्वारपालम् | द्वारपाल को |
| दौवारिकः | द्वारपालकः | द्वारपाल |
| वर्तनम् | वेतनम् | वेतन |
| उपपन्नम् | उपयुक्तम् / युक्तियुक्तम् | उपयुक्त / उचित |
| सुवर्णशतचतुष्टयम् | चतुश्शतसंख्यकाः स्वर्णमुद्राः | चार सौ स्वर्णमुद्राएँ |
| निर्गतः | बहिः गतवान् | बाहर चला गया |
| आलोक्य | दृष्ट्वा | देखकर |
| नियोजितः | सेवायां नियुक्तः | नियुक्त |
| धृतायुधः | शस्त्रयुक्तः | शस्त्र धारण किए हुए |
| अहर्निशम् | दिवसः रात्रिः च | दिन-रात |
| करुणरोदनध्वनिम् | करुणाजनकं रोदनध्वनिम् | करुणाजनक क्रन्दन-ध्वनि |
| व्यचिन्तयत् | अचिन्तयत् | सोचा |
| सूचिभेद्ये | गहने | सघन |
| तिमिरे | अन्धकारे | अन्धकार में |
| पृष्ठतः | पृष्ठभागात् | पीछे से |
| निरूपयामि | पश्यामि | देखता हूँ |
| खड्गपाणिः | खड्गवान् जनः | खड्गधारी |
| रोदनपरा | रोदनं कुर्वती | रोती हुई |
| विलपसि | रोदनं करोषि | रो रही हो |
| क्रन्दामि | रोदनं करोमि | रो रही हूँ |
| साष्टाङ्गं नमस्कृत्य | अष्टभिः अङ्गैः सह प्रणामं कृत्वा | आठों अंगों सहित प्रणाम करके |
| प्रत्युवाच | उत्तरं दत्तवती | उत्तर दिया |
| पञ्चत्वम् | मृत्युम् | मृत्यु को |
| अनाथा | स्वामिनं विना | स्वामी के बिना |
| प्रवृत्तिः | आचरणम् | आचरण |
| सुचिरम् | दीर्घकालं यावत् | दीर्घ काल तक |
| दुःसाध्या | काठिन्येन अनुपालनीया | कठिनाई से पालन करने योग्य |
| सहासवदनेन | हास्य-युक्त-मुखेन | हँसते हुए मुख से |
| निवत्स्यामि | वासं करिष्यामि | रहूँगी |
| तत्क्षणादेव | तत्कालम् | उसी क्षण |
ध्यान दीजिए: ‘उपपन्नम्’ सारणी में दो बार आया है — एक बार ‘उपयुक्तम्’ (Appropriate) और एक बार ‘युक्तियुक्तम्’ (Suitable) अर्थ में। दोनों जगह भाव एक ही है — ‘जो ठीक बैठे’। इसी तरह ‘विलपसि / क्रन्दामि / रोदनपरा’ — तीनों एक ही धातु-भाव (रोना) के अलग-अलग रूप हैं: क्रमशः मध्यमपुरुष एकवचन, उत्तमपुरुष एकवचन और स्त्रीलिङ्ग विशेषण (प्रथमा एकवचन)।