प्र1.
राजा — “किं ते वर्तनम् ?” (पृष्ठ 112)
उत्तर
उत्तरम् — वीरवरः — “प्रतिदिनं सुवर्णशतचतुष्टयं देव !”
हिन्दी अर्थ: राजा पूछते हैं — “तुम्हारा वेतन (कितना) है?” वीरवर उत्तर देता है — “हे देव! प्रतिदिन चार सौ स्वर्णमुद्राएँ।” सुवर्णशतचतुष्टयम् = सुवर्ण-शत × चतुष्टय = सौ स्वर्णमुद्राओं का चौगुना = 400 स्वर्णमुद्राएँ।
व्याकरण-सङ्केतः: ते — युष्मद् शब्द का षष्ठी एकवचन का लघु (अनुदात्त) रूप = ‘तव’ (तुम्हारा)। वर्तनम् — नपुंसकलिङ्ग, प्रथमा एकवचन; इसी का पर्याय ‘वेतनम्’ पाठ में आगे आता है (वेतनार्पणेन, वेतनार्थिनः)।