प्र1.
१. कर्तव्यनिष्ठाम् अधिकृत्य दश सूक्तीनां श्लोकानां वा सङ्ग्रहणं कुरुत।
उत्तर
करने की विधि: एक पतली कॉपी या चार्ट लीजिए। हर पृष्ठ पर एक सूक्ति/श्लोक इस क्रम में लिखिए — (1) मूल संस्कृत, (2) हिन्दी अर्थ, (3) ग्रन्थ का नाम, (4) एक पंक्ति में यह कि यह सूक्ति कर्तव्यनिष्ठा के बारे में क्या कहती है। श्लोक कहाँ से लें — गीता, यजुर्वेद, हितोपदेश, पञ्चतन्त्र, वाल्मीकि-रामायण, भर्तृहरि का नीतिशतक, चाणक्यनीति। अपनी पाठ्यपुस्तक दीपकम् में ही पाँचवें और दसवें पाठ में कई मिल जाएँगे।
नमूना उत्तर (दश सूक्तयः):
| क्रमः | सूक्तिः / श्लोकः | हिन्दी अर्थ | स्रोतः |
|---|---|---|---|
| १ | कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः। | कर्म करते हुए ही सौ वर्ष जीने की इच्छा करनी चाहिए। | यजुर्वेदः ४०.२ |
| २ | कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। | तेरा अधिकार कर्म में ही है, फलों में कभी नहीं। | श्रीमद्भगवद्गीता २.४७ |
| ३ | यथा छायातपौ नित्यं सुसंबद्धौ परस्परम्। | जैसे छाया और धूप, वैसे ही कर्म और कर्ता सदा जुड़े रहते हैं। | पञ्चतन्त्रम् |
| ४ | पूर्वकार्याविरोधेन स कार्यं कर्तुमर्हति। | पहले के कार्य में बाधा डाले बिना जो काम करे, वही कार्य करने योग्य है। | वाल्मीकि-रामायणम् |
| ५ | उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। | काम परिश्रम से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं। | हितोपदेशः |
| ६ | परोपकारार्थमिदं शरीरम्। | यह शरीर परोपकार के लिए ही है। | सुभाषितम् (पाठे) |
| ७ | आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। | आलस्य मनुष्य के शरीर में बैठा हुआ सबसे बड़ा शत्रु है। | हितोपदेशः |
| ८ | क्रियासिद्धिः सत्त्वे भवति महतां नोपकरणे। | महापुरुषों की सफलता उनके सत्त्व (आत्मबल) से होती है, साधनों से नहीं। | नीतिशतकम् (भर्तृहरिः) |
| ९ | श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। | भली प्रकार किए गए दूसरे के धर्म से, गुणरहित अपना धर्म ही श्रेष्ठ है। | श्रीमद्भगवद्गीता ३.३५ |
| १० | सन्निमित्ते वरं त्यागः। | अच्छे निमित्त के लिए त्याग ही श्रेष्ठ है। | अस्य पाठस्य शीर्षकम् |
Tip: प्रत्येक सूक्ति के नीचे दो-तीन पंक्तियों में यह भी लिख दीजिए कि वह वीरवर के किस कार्य पर ठीक बैठती है — जैसे सूक्ति ⑧ ‘क्रियासिद्धिः सत्त्वे…’ वीरवर के उत्तर ‘इमौ बाहू, एष खड्गश्च’ पर बिलकुल सटीक बैठती है। इससे आपकी परियोजना केवल सङ्ग्रह न रहकर विवेचन बन जाएगी।