प्र1.
“महोदय ! अस्य स्वरूपं किञ्चित् स्पष्टीकरोतु।” (श्रेया, पृष्ठ 64)
उत्तर
उत्तरम् (अध्यापकस्य वचनम्) — डिजिटल्-शासन-सेवायाः अन्तर्गतं ‘डिजी-लॉकर्’ (आधार-पॅन-कार्ड् इत्यादीनां डिजिटल्-सङ्ग्रहणम्), ‘ई-शासन-पटलम्’ यथा — ‘उमङ्ग्’ (UMANG), ‘माय्-गव्’ (My-Gov), ‘जेम्’ (GeM) इत्यादयः। ऑन्-लैन्–टीकाकरण-पञ्जीकरणार्थं ‘कोविन्-पटलम्’ (COWIN) अस्ति।
हिन्दी अर्थ: डिजिटल-शासन-सेवा के अन्तर्गत ‘डिजी-लॉकर’ आता है (जिसमें आधार, पैन-कार्ड आदि डिजिटल रूप में संगृहीत रहते हैं); ई-शासन के पटल हैं — उमंग (UMANG), माय-गव (My-Gov), जेम (GeM) आदि। ऑनलाइन टीकाकरण-पंजीकरण के लिए ‘कोविन’ (COWIN) पोर्टल है।
ध्यातव्यम्: श्रेया का वाक्य प्रश्न-चिह्न के बिना है, फिर भी यह प्रश्न ही है — स्पष्टीकरोतु लोट्-लकार, प्रथमपुरुष, एकवचन का आदरार्थक अनुरोध है (‘कृपया स्पष्ट कीजिए’)। संस्कृत में गुरुजनों से पूछते समय प्रश्न प्रायः इसी विनम्र आज्ञार्थ रूप में रखा जाता है।