दीपकम् अध्याय 6 पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“महोदय ! अस्य स्वरूपं किञ्चित् स्पष्टीकरोतु।” (श्रेया, पृष्ठ 64)
उत्तर
उत्तरम् (अध्यापकस्य वचनम्) — डिजिटल्-शासन-सेवायाः अन्तर्गतं ‘डिजी-लॉकर्’ (आधार-पॅन-कार्ड् इत्यादीनां डिजिटल्-सङ्ग्रहणम्), ‘ई-शासन-पटलम्’ यथा — ‘उमङ्ग्’ (UMANG), ‘माय्-गव्’ (My-Gov), ‘जेम्’ (GeM) इत्यादयः। ऑन्-लैन्–टीकाकरण-पञ्जीकरणार्थं ‘कोविन्-पटलम्’ (COWIN) अस्ति।
हिन्दी अर्थ: डिजिटल-शासन-सेवा के अन्तर्गत ‘डिजी-लॉकर’ आता है (जिसमें आधार, पैन-कार्ड आदि डिजिटल रूप में संगृहीत रहते हैं); ई-शासन के पटल हैं — उमंग (UMANG), माय-गव (My-Gov), जेम (GeM) आदि। ऑनलाइन टीकाकरण-पंजीकरण के लिए ‘कोविन’ (COWIN) पोर्टल है।
ध्यातव्यम्: श्रेया का वाक्य प्रश्न-चिह्न के बिना है, फिर भी यह प्रश्न ही हैस्पष्टीकरोतु लोट्-लकार, प्रथमपुरुष, एकवचन का आदरार्थक अनुरोध है (‘कृपया स्पष्ट कीजिए’)। संस्कृत में गुरुजनों से पूछते समय प्रश्न प्रायः इसी विनम्र आज्ञार्थ रूप में रखा जाता है।
प्र2.
“किन्तु यदि ग्राम्य-क्षेत्रे अन्तर्जालस्य समस्या अस्ति तर्हि तत्र कथम् एतासां सेवानाम् उपयोगः भविष्यति ?” (यशिका, पृष्ठ 64)
उत्तर
उत्तरम् (श्रेयायाः तथा भास्करस्य वचनम्) — सर्वकारः अन्तर्जालस्य उत्तरोत्तरं विस्ताराय कार्यं करोति। अनेन ग्राम्य-क्षेत्रे अपि उच्चगतेः जालस्य उपलब्धिः भविष्यति। एतासां सेवानाम् उपयोगः शिक्षायाः माध्यमेन अधिकाधिकं प्रचारणीयः।
हिन्दी अर्थ: सरकार इंटरनेट के उत्तरोत्तर विस्तार के लिए कार्य कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में भी उच्च गति के नेटवर्क की उपलब्धता हो जाएगी। और इन सेवाओं का उपयोग शिक्षा के माध्यम से अधिकाधिक फैलाया जाना चाहिए।
यही दो उपाय क्यों: पाठ ग्रामीण समस्या का उत्तर दो स्तरों पर देता है — (1) अवसंरचना (उच्चगतेः जालम् = high-speed network), और (2) डिजिटल्-साक्षरता (शिक्षायाः माध्यमेन प्रचारः)। केवल नेटवर्क पहुँचा देना पर्याप्त नहीं; उपयोग करना सिखाना भी आवश्यक है।
प्र3.
“आचार्य ! किं कृषिक्षेत्रे अपि डिजिटल्-भारतस्य योगदानम् अस्ति ?” (अथर्वः, पृष्ठ 65)
उत्तर
उत्तरम् — आम् ! ‘ई-नाम्’ (e-NAM), ‘पीएम्-किसान्-अनुप्रयोगः’ (PM KISAN), ड्रोन्-प्रौद्योगिकी इत्यादीनि पटलानि सन्ति।
हिन्दी अर्थ: हाँ! कृषि-क्षेत्र में भी ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाज़ार), पीएम-किसान ऐप और ड्रोन-प्रौद्योगिकी जैसे पटल (प्लेटफ़ॉर्म) हैं।
Tip: पृष्ठ 73 की योग्यताविस्तरः सारणी इसी उत्तर को बढ़ाती है — वहाँ कृषिक्षेत्र में ई-राष्ट्रिय-कृषि-आपणः (eNAM), प्रधानमन्त्री-किसान्-सम्माननिधिः (PM-KISAN), चल-किसान्-सन्देश-सेवा (mKisan), कृषक-सुविधा-सेवा (Kisan Suvidha) — चार नाम दिए गए हैं। परीक्षा में यही अतिरिक्त नाम अंक बढ़ाते हैं।
प्र4.
“बहु सम्यक्। किन्तु ‘डिजिटल्’ इत्यस्य वाणिज्ये कीदृशः प्रभावः अस्ति ?” (यशिका, पृष्ठ 65)
उत्तर
उत्तरम् — आभासीय-पटलम् अनुप्रयोगः च इत्येतयोः माध्यमेन आभासीयं (ऑन्-लैन्) विक्रयं भवति। ‘आशु-प्रतिक्रिया-कूटः’ (QR Code) इत्याधारितः विनिमयश्च भवति।
हिन्दी अर्थ: आभासीय पटल (वेबसाइट) तथा अनुप्रयोग (ऐप) — इन दोनों के माध्यम से ऑनलाइन विक्रय होता है, और QR कोड के आधार पर लेन-देन भी होता है।
पाठ से जोड़िए: इसी चर्चा में अध्यापक ने पहले कहा था — अधुना आपणेषु वस्तुक्रयणार्थं साक्षात् मुद्रायाः आवश्यकता नास्ति। मुद्रारहित-विनिमयसन्दर्भे विश्वे भारतस्य अग्रगण्यं स्थानम् अस्ति। (नकद रहित लेन-देन में विश्व में भारत का स्थान सबसे आगे है।)
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