प्र1.
अधः प्रदत्तानां पदानाम् उदाहरणानुसारं विभक्तिं वचनं च लिखत —
यथा — मातः = सम्बोधनम्, एकवचनम्।
(पदानि) तव · मञ्जूषा · संस्कृतिः · जनानाम् · जीवनस्य · धरायाम् · शास्त्रेषु
यथा — मातः = सम्बोधनम्, एकवचनम्।
(पदानि) तव · मञ्जूषा · संस्कृतिः · जनानाम् · जीवनस्य · धरायाम् · शास्त्रेषु
उत्तर
| पदम् | विभक्तिः | वचनम् | लिङ्गम् / मूलशब्दः |
|---|---|---|---|
| यथा — मातः | सम्बोधनम् | एकवचनम् | स्त्रीलिङ्गम् — मातृ |
| तव | षष्ठी | एकवचनम् | सर्वनाम — युष्मद् |
| मञ्जूषा | प्रथमा | एकवचनम् | स्त्रीलिङ्गम् — मञ्जूषा |
| संस्कृतिः | प्रथमा | एकवचनम् | स्त्रीलिङ्गम् — संस्कृति |
| जनानाम् | षष्ठी | बहुवचनम् | पुंलिङ्गम् — जन |
| जीवनस्य | षष्ठी | एकवचनम् | नपुंसकलिङ्गम् — जीवन |
| धरायाम् | सप्तमी | एकवचनम् | स्त्रीलिङ्गम् — धरा |
| शास्त्रेषु | सप्तमी | बहुवचनम् | नपुंसकलिङ्गम् — शास्त्र |
पहचानने का तरीका — प्रत्यय देखिए:
- -स्य / -याः → षष्ठी एकवचन (जीवनस्य)
- -आनाम् / -ानाम् → षष्ठी बहुवचन (जनानाम्)
- -ए / -आयाम् → सप्तमी एकवचन (धरायाम्)
- -एषु / -ासु → सप्तमी बहुवचन (शास्त्रेषु)
- बिना किसी प्रत्यय के, कर्ता के रूप में खड़ा पद → प्रथमा (मञ्जूषा, संस्कृतिः)
ध्यातव्यम् — ‘तव’ पर विशेष: ‘तव’ युष्मद् (तुम) सर्वनाम की षष्ठी एकवचन है = ‘तुम्हारा’। यह सर्वनाम है, इसलिए इसका कोई अलग लिङ्ग नहीं होता — पुरुष हो या स्त्री, ‘तव’ ही रहेगा। श्लोक १ में ‘अयि मातस्तव पोषणक्षमता’ = ‘हे माता, तुम्हारी पोषण-क्षमता’।
Check it yourself: ‘संस्कृतिः’ और ‘मञ्जूषा’ दोनों प्रथमा एकवचन हैं, पर उनके अन्त अलग दिखते हैं — इसका कारण यह है कि ‘मञ्जूषा’ आकारान्त स्त्रीलिङ्ग (रमा जैसा) है और ‘संस्कृतिः’ इकारान्त स्त्रीलिङ्ग (मति जैसा)। प्रथमा एकवचन में आकारान्त का रूप नहीं बदलता, इकारान्त में विसर्ग जुड़ता है।