दीपकम् अध्याय 7 मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

पाठ का स्वरूप — यह कोई कथा या संवाद-पाठ नहीं, बल्कि चार पद्यों का गीत है। हर पद्य का अन्तिम शब्द ‘ सुन्दरसुरभाषा ’ है — यही टेक (ध्रुवपद) पूरे गीत को बाँधती है। ‘सुरभाषा’ = देवताओं की भाषा, अर्थात् संस्कृत। शीर्षक का अर्थ — मञ्जुला = मन को हरने वाली, मञ्जूषा = पेटी। इसलिए ‘मञ्जुलमञ्जूषा’ का अर्थ है — मनोहर रूप में संकलित शब्दों की सुन्दर पेटी । कवि कहता है कि यह पेटी मुनियों ने विकसित की और कवियों ने सजाया। चार पद्यों की चार बातें — (१) संस्कृत मुनि-कवियों की सँवारी शब्द-मञ्जूषा है, उसकी पोषणक्षमता वर्णन से परे है; (२) वह वेदव्यास-वाल्मीकि जैसे मुनियों, कालिदास-बाण जैसे कवियों तथा सामान्य जनों — सबके जीवन की आशा है; (३) वह कानों को सुख देने वाली, सबको आनन्द देने वाली, स्मृति-हितकारी तथा हमारी संस्कृति है; (४) वह नवरसों, अलङ्कारों, वेद-वेदान्त-विचारों तथा आयुर्वेद-खगोलशास्त्र सहित धरती पर व

  1. चित्र-संवादः (पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः)
  2. श्लोक-व्याख्या (पदच्छेदः · अन्वयः · अर्थः · भावः)
  3. श्लोक-व्याख्या (पदच्छेदः · अन्वयः · अर्थः · भावः)
  4. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  5. अत्र इदम् अवधेयम्
  6. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  7. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  8. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  9. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  10. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  11. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  12. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  13. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  14. योग्यताविस्तरः
  15. परियोजनाकार्यम्
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