दीपकम् अध्याय 7 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पेटिका — कालिदासबाणादि, आशा, संस्कृतिः, विजयते, मम, वेदविषय, मञ्जुलमञ्जूषा, सकलप्रमोदे
यथा — मुनिवर-विकसित-कविवर-विलसित- मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा।
— सम्पूर्ण उत्तर-तालिका दीजिए।
उत्तर
क्रमःपूर्ण पङ्क्तिः (रिक्तस्थानं पूरितम्)पेटिकातः पदम्
यथामुनिवर-विकसित-कविवर-विलसित- मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा।मञ्जुलमञ्जूषा
(क)अयि मातः तव पोषणक्षमता मम वचनातीता।मम
(ख)वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनीनां कालिदासबाणादि कवीनाम्।कालिदासबाणादि
(ग)पौराणिक-सामान्य-जनानां जीवनस्य आशाआशा
(घ)श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे।सकलप्रमोदे
(ङ)गति-मति-प्रेरक-काव्य-विशारदे, तव संस्कृतिः एषा सुन्दरसुरभाषा।संस्कृतिः
(च)नवरस-रुचिरालङ्कृतिधारा वेदविषय-वेदान्तविचारा।वेदविषय
(छ)वैद्य-व्योम-शास्त्रादि-विहारा विजयते धरायाम्, सुन्दरसुरभाषा।विजयते
Tip — भरने की विधि: पेटिका में आठ पद हैं और उदाहरण सहित आठ ही स्थान — इसलिए हर पद ठीक एक बार आएगा। पहले वे स्थान भरिए जहाँ तुक या व्याकरण सुराग देते हैं (जैसे (घ) में ‘-दे’ अन्त वाले सम्बोधन चाहिए, तो ‘सकलप्रमोदे’ ही बैठेगा), फिर बचे हुए पद बचे स्थानों में रखिए।
प्र2.
अयि मातः तव पोषणक्षमता ………………… वचनातीता।
उत्तर
उत्तरम् — अयि मातः तव पोषणक्षमता मम वचनातीता।
हिन्दी अर्थ: हे माता ! तुम्हारी पोषण-क्षमता मेरी वाणी से परे है। — कवि स्वयं को सामने रखकर कहता है कि मैं वर्णन नहीं कर सकता।
क्यों ‘मम’: ‘वचनातीता’ का अर्थ है ‘वचन से परे’ — किसके वचन से ? यह बताने के लिए षष्ठी विभक्ति चाहिए। पेटिका में एकमात्र षष्ठी-रूप ‘मम’ ही है। यही अभ्यास-प्रश्न १ (क) का भी उत्तर है।
प्र3.
वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनीनां ………………… कवीनाम्।
उत्तर
उत्तरम् — वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनीनां कालिदासबाणादि कवीनाम्।
हिन्दी अर्थ: वेदव्यास और वाल्मीकि जैसे मुनियों की तथा कालिदास, बाणभट्ट आदि कवियों की …
क्यों यही पद: रिक्त स्थान के ठीक बाद ‘कवीनाम्’ है, अर्थात् कवियों के नाम चाहिए। पेटिका में कवि-नाम वाला एकमात्र पद ‘कालिदासबाणादि’ है। ‘कालिदासबाणादि + कवीनाम्’ मिलकर एक ही समस्तपद ‘कालिदासबाणादिकवीनाम्’ बनता है।
प्र4.
पौराणिक-सामान्य-जनानां जीवनस्य …………………।
उत्तर
उत्तरम् — पौराणिक-सामान्य-जनानां जीवनस्य आशा
हिन्दी अर्थ: पुराणों के अध्येताओं तथा सामान्य जनों के जीवन की आशा (संस्कृतभाषा है)।
क्यों यही पद: ‘जीवनस्य’ षष्ठी है — ‘किसका ?’ का उत्तर तो मिल गया, अब ‘क्या ?’ चाहिए, अर्थात् प्रथमा विभक्ति का संज्ञापद। पेटिका में ‘आशा’ ही ऐसा पद है। यही प्रश्न १ (ग) का उत्तर भी है।
प्र5.
श्रुतिसुखनिनदे ………………… स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे।
उत्तर
उत्तरम् — श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे।
हिन्दी अर्थ: हे कर्णप्रिय ध्वनि वाली ! हे सबको आनन्द देने वाली ! हे स्मृति को हितकारी वरदान देने वाली ! हे मधुर विनोद करने वाली !
क्यों यही पद: आस-पास के तीनों पद सम्बोधन एकवचन में हैं और ‘-दे’ पर समाप्त होते हैं। पेटिका में इसी साँचे का एकमात्र पद ‘सकलप्रमोदे’ है — तुक और विभक्ति, दोनों मिल जाती हैं।
प्र6.
गति-मति-प्रेरक-काव्य-विशारदे, तव ………………… एषा सुन्दरसुरभाषा।
उत्तर
उत्तरम् — गति-मति-प्रेरक-काव्य-विशारदे, तव संस्कृतिः एषा सुन्दरसुरभाषा।
हिन्दी अर्थ: हे गति और बुद्धि को प्रेरित करने वाले काव्य में पारंगत ! यह संस्कृति तुम्हारी ही है, हे सुन्दर देवभाषा !
क्यों यही पद: ‘तव … एषा’ — ‘तुम्हारी यह …’ के बीच कोई स्त्रीलिङ्ग प्रथमा एकवचन संज्ञा चाहिए, क्योंकि ‘एषा’ स्त्रीलिङ्ग है। पेटिका में ‘संस्कृतिः’ ही ऐसा पद है। मूल श्लोक में यह ‘संस्कृतिरेषा’ के रूप में सन्धि किए हुए छपा है (संस्कृतिः + एषा)।
प्र7.
नवरस-रुचिरालङ्कृतिधारा ………………… -वेदान्तविचारा।
उत्तर
उत्तरम् — नवरस-रुचिरालङ्कृतिधारा वेदविषय-वेदान्तविचारा।
हिन्दी अर्थ: नौ रसों से मनोहर तथा अलङ्कारों को धारण करने वाली, वेद-विषय और वेदान्त के विचारों से युक्त …
क्यों यही पद: रिक्त स्थान के तुरन्त बाद एक योजक चिह्न (-) छपा है, अर्थात् वहाँ समास का पूर्वपद आना है, स्वतन्त्र पद नहीं। पेटिका में केवल ‘वेदविषय’ ही ऐसा अपूर्ण (प्रातिपदिक) रूप है — शेष सब पूरे पद हैं।
प्र8.
वैद्य-व्योम-शास्त्रादि-विहारा ………………… धरायाम्, सुन्दरसुरभाषा।
उत्तर
उत्तरम् — वैद्य-व्योम-शास्त्रादि-विहारा विजयते धरायाम्, सुन्दरसुरभाषा।
हिन्दी अर्थ: आयुर्वेद, खगोलशास्त्र आदि शास्त्रों में विचरण करने वाली सुन्दर देवभाषा धरती पर विजयी होती है
क्यों यही पद: पूरे रिक्तस्थान-अभ्यास में यही एक वाक्य ऐसा है जिसमें अब तक कोई क्रिया नहीं है — और पेटिका में एकमात्र क्रियापद ‘विजयते’ है (वि + जि, आत्मनेपद, लट् लकार, प्रथमपुरुष एकवचन)। इसीलिए वही यहाँ बैठता है।
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