दीपकम् अध्याय 7 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
यथा, देवस्य आलयः = देवालयः। (क) सुराणां भाषा = ?
उत्तर
उत्तरम् — सुरभाषा
हिन्दी अर्थ: ‘सुराणां भाषा’ = देवताओं की भाषा, जिसका एक पद है सुरभाषा। यही शब्द पाठ की टेक ‘सुन्दरसुरभाषा’ में आता है।
समासः: यह षष्ठी तत्पुरुष है — विग्रह में षष्ठी विभक्ति (‘णाम्’) दिखती है, समास बनने पर लुप्त हो जाती है। पुस्तक की ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ पेटी में इसी को तत्पुरुष का उदाहरण बताया गया है — “तत्पुरुषसमासे परपदस्य प्राधान्यं भवति। यथा — सुराणां भाषा — सुरभाषा।”
प्र2.
सुन्दरी सुरभाषा = ?
उत्तर
उत्तरम् — सुन्दरसुरभाषा
हिन्दी अर्थ: ‘सुन्दरी सुरभाषा’ = सुन्दर देवभाषा = सुन्दरसुरभाषा। यही पाठ का शीर्षक-शब्द और गीत की टेक है।
समासः: यह कर्मधारय है, क्योंकि ‘सुन्दरी’ विशेषण है और ‘सुरभाषा’ विशेष्य। समास बनते समय स्त्रीलिङ्ग विशेषण ‘सुन्दरी’ अपना पुंवद्भाव लेकर ‘सुन्दर’ हो जाता है — इसीलिए ‘सुन्दरीसुरभाषा’ नहीं, ‘सुन्दरसुरभाषा’ बनता है।
प्र3.
नवरसैः रुचिरा = ?
उत्तर
उत्तरम् — नवरसरुचिरा
हिन्दी अर्थ: ‘नवरसैः रुचिरा’ = नौ रसों से मनोहर = नवरसरुचिरा। श्लोक ४ का पहला ही शब्द यही है — ‘नवरस-रुचिरालङ्कृति-धारा’।
समासः: यह तृतीया तत्पुरुष है — विग्रह में तृतीया विभक्ति (‘ऐः’) है। यह उदाहरण पुस्तक की ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ पेटी में भी दिया गया है — “नवरसैः रुचिरा — नवरसरुचिरा”।
प्र4.
पोषणस्य क्षमता = ?
उत्तर
उत्तरम् — पोषणक्षमता
हिन्दी अर्थ: ‘पोषणस्य क्षमता’ = पोषण करने की क्षमता = पोषणक्षमता। श्लोक १ की पङ्क्ति — ‘अयि मातस्तव पोषणक्षमता मम वचनातीता’।
समासः: षष्ठी तत्पुरुष — पुस्तक की पेटी में भी यही उदाहरण छपा है (“पोषणस्य क्षमता — पोषणक्षमता”)। अर्थ का बल दूसरे पद ‘क्षमता’ पर है, इसीलिए तत्पुरुष है।
प्र5.
मञ्जुला भाषा = ?
उत्तर
उत्तरम् — मञ्जुलभाषा
हिन्दी अर्थ: ‘मञ्जुला भाषा’ = मन को हरने वाली भाषा = मञ्जुलभाषा। पाठ में इसी रीति से ‘मञ्जुला मञ्जूषा’ का समास होकर मञ्जुलमञ्जूषा बना है — जो पाठ का शीर्षक है।
समासः: कर्मधारय (विशेषण + विशेष्य)। ध्यान दीजिए — (ख) की ही तरह यहाँ भी स्त्रीलिङ्ग विशेषण ‘मञ्जुला’ समास में ‘मञ्जुल’ बन जाता है। यह पुंवद्भाव का नियम कर्मधारय की पहचान का सबसे अच्छा सुराग है।
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