प्र1.
अधोलिखितानां पद्यांशानां यथायोग्यं मेलनं कुरुत —
कवर्गः — (क) अयि मातस्तव पोषणक्षमता · (ख) वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनीनां · (ग) पौराणिक-सामान्यजनानाम् · (घ) श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे · (ङ) वैद्यव्योम-शास्त्रादिविहारा
खवर्गः — स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे · विजयते धरायाम् · मम वचनातीता, सुन्दरसुरभाषा · कालिदासबाणादिकवीनाम् · जीवनस्य आशा, सुन्दरसुरभाषा
कवर्गः — (क) अयि मातस्तव पोषणक्षमता · (ख) वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनीनां · (ग) पौराणिक-सामान्यजनानाम् · (घ) श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे · (ङ) वैद्यव्योम-शास्त्रादिविहारा
खवर्गः — स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे · विजयते धरायाम् · मम वचनातीता, सुन्दरसुरभाषा · कालिदासबाणादिकवीनाम् · जीवनस्य आशा, सुन्दरसुरभाषा
उत्तर
| कवर्गः | खवर्गः (सही मेल) | श्लोकः |
|---|---|---|
| (क) अयि मातस्तव पोषणक्षमता | मम वचनातीता, सुन्दरसुरभाषा | १ (दिया गया उदाहरण) |
| (ख) वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनीनां | कालिदासबाणादिकवीनाम् | २ |
| (ग) पौराणिक-सामान्यजनानाम् | जीवनस्य आशा, सुन्दरसुरभाषा | २ |
| (घ) श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे | स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे | ३ |
| (ङ) वैद्यव्योम-शास्त्रादिविहारा | विजयते धरायाम् | ४ |
मेल कैसे पहचानें: हर पद्य की पङ्क्तियाँ क्रम से जुड़ी हैं, इसलिए पहले श्लोक पहचानिए, फिर उसकी अगली पङ्क्ति उठाइए।
- (ख) और (ग) दोनों श्लोक २ से हैं — (ख) पहली पङ्क्ति है, तो उसकी जोड़ी दूसरी पङ्क्ति ‘कालिदासबाणादिकवीनाम्’ है; (ग) तीसरी पङ्क्ति है, तो उसकी जोड़ी चौथी पङ्क्ति ‘जीवनस्य आशा…’ है।
- (घ) श्लोक ३ की पहली पङ्क्ति है → उसकी जोड़ी दूसरी पङ्क्ति ‘स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे’।
- (ङ) श्लोक ४ की तीसरी पङ्क्ति है → उसकी जोड़ी अन्तिम पङ्क्ति ‘विजयते धरायाम्’।
Tip: तुक (अन्त्यानुप्रास) भी सहायता करती है — ‘निनदे’ की तुक ‘विनोदे’ से मिलती है, ‘विहारा’ की तुक ‘धरायाम्’ वाली पङ्क्ति से। संस्कृत गीतों में जोड़ी पहचानने का यह सबसे तेज़ तरीका है।