दीपकम् अध्याय 7 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
सुन्दरसुरभाषा कस्य वचनातीता ?
उत्तर
उत्तरम् — मम (कवेः)।

श्लोक १ की पङ्क्ति — “अयि मातस्तव पोषणक्षमता मम वचनातीता”। अर्थात् संस्कृतभाषा की पोषण-क्षमता कवि की वाणी से परे है।

हिन्दी अर्थ: ‘मेरे’ — यहाँ ‘मैं’ अर्थात् गीत गाने वाला कवि। वह कहता है कि माता संस्कृत की पालन-शक्ति इतनी बड़ी है कि मेरे शब्द उसका वर्णन नहीं कर सकते।
व्याकरण-सङ्केतः: मम — अस्मद् शब्द की षष्ठी विभक्ति, एकवचन। प्रश्न में ‘कस्य’ भी षष्ठी एकवचन है — प्रश्नवाचक और उत्तर की विभक्ति सदा एक ही रहती है। यही परखने के लिए यह प्रश्न बना है।
प्र2.
संस्कृतभाषा कुत्र विजयते ?
उत्तर
उत्तरम् — धरायाम् (पृथिव्याम्)।

श्लोक ४ की अन्तिम पङ्क्ति — “विजयते धरायां, सुन्दरसुरभाषा”

हिन्दी अर्थ: संस्कृतभाषा धरती पर विजयी होती है। कवि यह नहीं कहता कि वह किसी एक देश या एक वर्ग में सफल है — वह पूरी पृथ्वी पर विजयी है, क्योंकि उसमें काव्य भी है, दर्शन भी, और विज्ञान भी।
व्याकरण-सङ्केतः: धरायाम् — ‘धरा’ (स्त्रीलिङ्ग) की सप्तमी विभक्ति, एकवचन, अधिकरण (आधार) के अर्थ में। ‘कुत्र’ प्रश्न का उत्तर सदा सप्तमी विभक्ति या स्थानवाचक अव्यय में आता है।
प्र3.
संस्कृतभाषा कस्य आशा ?
उत्तर
उत्तरम् — जीवनस्य

श्लोक २ की अन्तिम पङ्क्ति — जीवनस्य आशा, सुन्दरसुरभाषा”

हिन्दी अर्थ: संस्कृतभाषा जीवन की आशा है — मुनियों, कवियों तथा सामान्य जनों, सबके जीवन की। ‘आशा’ यहाँ केवल इच्छा नहीं, सहारा और भरोसा के अर्थ में है।
व्याकरण-सङ्केतः: जीवनस्य — षष्ठी विभक्ति, एकवचन, नपुंसकलिङ्ग। ध्यान दीजिए — इसी पद्य के ‘मुनीनाम्, कवीनाम्, जनानाम्’ भी षष्ठी हैं, पर बहुवचन। अभ्यास-प्रश्न ४ यही अन्तर जाँचता है।
प्र4.
संस्कृते कति रसाः सन्ति ?
उत्तर
उत्तरम् — नव (नवसंख्याकाः)।

श्लोक ४ के भावार्थ में पुस्तक स्वयं गिनाती है — शृङ्गार-हास्य-करुण-रौद्र-वीर-भयानक-बीभत्स-अद्भुत-शान्त-प्रभृतयः नवसंख्याकाः रुचिराः रसाः सन्ति।

हिन्दी अर्थ: संस्कृत काव्यशास्त्र में नौ रस माने गए हैं — शृङ्गार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत और शान्त। इसीलिए इन्हें ‘नवरस’ कहते हैं, और पद्य का पहला शब्द ही ‘नवरस-रुचिरा’ है।
व्याकरण-सङ्केतः: नव संख्यावाचक शब्द है। ‘नवसंख्याकाः रसाः = नवरसाः’ — यह द्विगु समास है, क्योंकि पूर्वपद संख्यावाचक है।
प्र5.
कस्याः ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्धते ?
उत्तर
उत्तरम् — संस्कृतभाषायाः

श्लोक ३ का भावार्थ — संस्कृतभाषायाः ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्धते, सर्वे जनाः आनन्दिताः भवन्ति।”

हिन्दी अर्थ: संस्कृतभाषा की ध्वनि सुनने से सुख बढ़ता है। यही बात पद्य के सम्बोधन ‘श्रुतिसुखनिनदे’ (कानों को सुख देने वाली ध्वनि वाली) में कही गई है।
व्याकरण-सङ्केतः: संस्कृतभाषायाः — षष्ठी विभक्ति, एकवचन, स्त्रीलिङ्ग। प्रश्न में ‘कस्याः’ है — स्त्रीलिङ्ग षष्ठी एकवचन; इसलिए उत्तर भी स्त्रीलिङ्ग में ही आना चाहिए, ‘संस्कृतस्य’ नहीं।
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