दीपकम् अध्याय 8 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
‘महोदये ! मम भगिनी कथयति’। अत्र ‘मम’ इति सर्वनामपदं कस्यै प्रयुक्तम् ?
उत्तर

‘स्वरायै’ — अर्थात् स्वरा नाम्न्यै छात्रायै ‘मम’ इति सर्वनामपदं प्रयुक्तम्।

(यहाँ ‘मम’ सर्वनाम स्वरा नाम की छात्रा के लिए प्रयुक्त हुआ है।)

कैसे पहचानें: संवाद में यह वाक्य स्वरा बोलती है — “स्वरा – महोदये ! मम भगिनी कथयति यत् ...”। ‘मम’ (मेरा) उत्तमपुरुष का सर्वनाम है, इसलिए वह हमेशा बोलने वाले की ओर संकेत करता है। संवाद में वक्ता का नाम देखते ही उत्तर मिल जाता है।
व्याकरणम्: ‘मम’ = अस्मद् शब्द की षष्ठी विभक्ति, एकवचन। प्रश्न ‘कस्यै’ (चतुर्थी एकवचन स्त्रीलिङ्ग) है, अतः उत्तर भी चतुर्थी में — ‘स्वरायै’।
प्र2.
‘सामाजिक-सांस्कृतिकपरिदृश्यानां साम्याद् इमानि उक्तोपाधिना प्रथितानि’। अस्मिन् वाक्ये प्रथितानि इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम् ?
उत्तर

‘इमानि’ (इमानि राज्यानि) इति कर्तृपदम्।

(इस वाक्य में ‘प्रथितानि’ क्रिया का कर्ता ‘इमानि’ अर्थात् ‘ये राज्य’ है।)

पहचान का तरीका: कर्ता खोजने के लिए क्रिया से पूछिए — ‘कानि प्रथितानि ?’ उत्तर मिलेगा ‘इमानि’। साथ ही देखिए कि कर्ता और क्रिया का लिङ्ग-वचन मिलता है — ‘इमानि’ (नपुंसकलिङ्ग, प्रथमा, बहुवचन) और ‘प्रथितानि’ (नपुंसकलिङ्ग, प्रथमा, बहुवचन)। यही मेल कर्ता होने का प्रमाण है।
प्र3.
‘एतेषां राज्यानां पुनः सङ्घटनं विहितम्’। अत्र ‘सङ्घटनम्’ इति कर्तृपदस्य क्रियापदं किम् ?
उत्तर

‘विहितम्’ इति क्रियापदम्।

(‘सङ्घटनम्’ कर्ता का क्रियापद ‘विहितम्’ है — अर्थात् ‘किया गया’।)

पहचान: ‘विहितम्’ वि + धा धातु से क्त प्रत्यय द्वारा बना भूतकालिक कृदन्त है, जो यहाँ क्रिया का काम कर रहा है। कर्ता ‘सङ्घटनम्’ नपुंसकलिङ्ग प्रथमा एकवचन है और ‘विहितम्’ भी वही — लिङ्ग-वचन का मेल इस जोड़ी को पक्का कर देता है। पूरे वाक्य का अर्थ — ‘इन राज्यों का पुनः गठन किया गया।’
प्र4.
‘अत्र वंशवृक्षाणां प्राचुर्यं विद्यते’। अस्मात् वाक्यात् ‘अल्पता’ इति पदस्य विपरीतार्थकं पदं चित्वा लिखत ?
उत्तर

‘प्राचुर्यम्’।

(‘अल्पता’ का विपरीतार्थक पद ‘प्राचुर्यम्’ अर्थात् ‘बहुतायत / प्रचुरता’ है।)

पदम्अर्थः
अल्पताथोड़ापन, कमी
प्राचुर्यम्बहुतायत, प्रचुरता
वाक्यप्रयोगः: ‘पूर्वोत्तरराज्येषु वंशवृक्षाणां प्राचुर्यं विद्यते, जलस्य अल्पता तु नास्ति।’ — यही जोड़ी अभ्यास ७ (छ) में भी भरनी है।
प्र5.
‘क्षेत्रपरिमाणैः इमानि लघूनि वर्तन्ते’। अस्मिन् वाक्ये ‘सन्ति’ इति क्रियापदस्य किं समानार्थकं पदं प्रयुक्तम् ?
उत्तर

‘वर्तन्ते’।

(‘सन्ति’ का समानार्थक पद ‘वर्तन्ते’ है — दोनों का अर्थ ‘हैं’ होता है।)

अन्तर समझिए: ‘अस्’ धातु परस्मैपदी है (अस्ति, स्तः, सन्ति), जबकि ‘वृत्’ धातु आत्मनेपदी है (वर्तते, वर्तेते, वर्तन्ते)। अर्थ एक है, पर पद (परस्मैपद / आत्मनेपद) भिन्न है। इसी पाठ में ‘वर्तते’ भी अनेक बार आया है — ‘संस्कृतिः महत्त्वाधायिनी वर्तते’, ‘प्रयोगोऽयं प्रतीकात्मको वर्तते’।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ