प्र1.
पूर्वाग्नेयी दक्षिणा च नैर्ऋती पश्चिमा तथा।
वायवी चोत्तरैशानी ऊर्ध्वा चाधो दिशो दश॥ — श्लोकस्य पदच्छेदम् अर्थं च लिखत। दश दिशः नामतः लिखत।
वायवी चोत्तरैशानी ऊर्ध्वा चाधो दिशो दश॥ — श्लोकस्य पदच्छेदम् अर्थं च लिखत। दश दिशः नामतः लिखत।
उत्तर
यह श्लोक दस दिशाओं के नाम एक ही पंक्ति में गिना देता है।
पदच्छेदः — पूर्वा + आग्नेयी + दक्षिणा + च + नैर्ऋती + पश्चिमा + तथा।
वायवी + च + उत्तरा + ऐशानी + ऊर्ध्वा + च + अधः + दिशः + दश।
वायवी + च + उत्तरा + ऐशानी + ऊर्ध्वा + च + अधः + दिशः + दश।
अन्वयः — पूर्वा, आग्नेयी, दक्षिणा च, नैर्ऋती, पश्चिमा तथा, वायवी च, उत्तरा, ऐशानी, ऊर्ध्वा च अधः (इति) दश दिशः।
अर्थः — पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैर्ऋत्य, पश्चिम, वायव्य, उत्तर, ईशान, ऊर्ध्व (ऊपर) तथा अधः (नीचे) — ये दस दिशाएँ हैं।
| दिक् (संस्कृतम्) | English | दिक् (संस्कृतम्) | English |
|---|---|---|---|
| पूर्वा | East | आग्नेयी | South-East |
| दक्षिणा | South | नैर्ऋती | South-West |
| पश्चिमा | West | वायवी | North-West |
| उत्तरा | North | ईशानी | North-East |
| ऊर्ध्वा | Up / High | अधः | Down / Low |
क्रम कैसे चलता है: श्लोक पूर्व से आरम्भ करके घड़ी की दिशा में घूमता है — पूर्वा → आग्नेयी → दक्षिणा → नैर्ऋती → पश्चिमा → वायवी → उत्तरा → ईशानी। इस प्रकार चार मुख्य दिशाओं के बीच-बीच में चार कोण-दिशाएँ आती हैं। अन्त में ऊपर-नीचे जोड़ने से कुल दश दिशः हो जाती हैं।