दीपकम् अध्याय 8 वयं शब्दार्थान् जानीमः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अधोलिखितानां पाठगतशब्दानां संस्कृत-अर्थं, हिन्दी-अर्थं, आङ्ग्ल-अर्थं च लिखत। (मातृभाषया अर्थं लिखत)
उत्तर

पाठ की दोनों शब्दार्थ-सारणियाँ नीचे एक साथ दी गई हैं। ‘मातृभाषया अर्थं लिखत’ स्तम्भ में हिन्दी-भाषी छात्र ‘हिन्दी’ वाला अर्थ लिखेंगे; जिनकी मातृभाषा अन्य है, वे अपनी भाषा में वही अर्थ लिखें।

शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglish
स्वदेशस्यनिजराष्ट्रस्यअपने देश काOf our country
वैचित्र्यम्विशिष्टं स्वरूपम्विचित्रताUniqueness
प्रवहन्तिप्रकर्षेण वहन्तिबहती हैंFlows
भू-वैविध्यम्भूमेः विविधताभूमि की विविधताLand diversity
पीठस्थलानिखण्डस्थलानिपठारPlateau
जानीथअवगच्छथजानते हो(You all) Know
ऐशान्यम्पूर्वोत्तरदिशापूर्वोत्तर दिशाNorth-East corner
ज्ञातुम्वेदितुम्जानने के लिएTo know
भागेभ्यःखण्डेभ्यःभागों सेFrom parts
समवायःसमाहारःसमूहCombination
केन्द्रशासितप्रदेशाःप्रत्यक्षं केन्द्रशासनाधीनाः प्रदेशाःकेन्द्र द्वारा शासित प्रदेशUnion Territories
अतिरिच्यअतिरिक्तभावेनइसके अतिरिक्तBesides
प्रथितःप्रख्यातःप्रसिद्धFamous
प्रतीकात्मकःसाङ्केतिकःप्रतीकात्मकSymbolic
साम्याद्सादृश्याद्समानता के कारणBecause of similarity
उक्तोपाधिनाउक्तेन नाम्नादिए हुए नाम सेBy the given name
क्षेत्रपरिमाणैःक्षेत्रफलस्य परिमाणेनक्षेत्रफल के नाप सेBy extent of area
गुणगौरवदृष्ट्यागुणस्य गौरवस्य च दृष्ट्यागुण एवं गौरव की दृष्टि सेIn terms of virtues and glory
बृहत्तराणिविशालानिबहुत बड़ेVery significant
स्वाधीनाःस्वतन्त्राःस्वतन्त्रIndependent
स्वायत्तीकृताःअधीनीकृताःअपने अधीन किए गएCaptured / Autonomous
प्राकृतिकसंपद्भिःप्रकृतिजात-विभवैःप्राकृतिक संपदाओं सेWith rich natural resources
पुष्पस्तबकसदृशानिपुष्पपुञ्जसमानानिपुष्प-गुच्छ के समानLike flower bouquet
सावहितमनसासावधानमनसाध्यानपूर्वकWith attention
ऊर्जस्विनःऊर्जायुक्ताःशक्तिशालीEnergetic
पर्वपरम्पराभिःउत्सवपरम्पराभिःउत्सवों की परंपरा सेBy the festive traditions
परिपूरिताःपरिपूर्णाःभरपूरFull of
स्वलीलाकलाभिःनिजकेलि-कलाभिःअपनी लीलाओं सेBy own amusements and pastimes
निष्णाताःपारङ्गताःनिपुणExperts / Master
वंशवृक्षाणाम्वंशपादपानाम्बाँस के वृक्षों केOf bamboo trees
बह्वाकर्षकःअत्याकर्षकःअत्यधिक आकर्षकVery attractive
Tip: इन शब्दों में बहुत-से तृतीया-बहुवचन के रूप हैं — प्राकृतिकसंपद्भिः, पर्वपरम्पराभिः, स्वलीलाकलाभिः, क्षेत्रपरिमाणैः। इन्हें ‘…के द्वारा / …से’ पढ़िए, तभी वाक्य का अर्थ खुलता है।
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