सप्तराज्यसमूहोऽयं भगिनीसप्तकं मतम्॥ — अस्य श्लोकस्य पदच्छेदम्, अन्वयम्, अर्थं भावं च लिखत।
यह श्लोक पहेली की शैली में सातों बहनों के नाम गिनाता है — प्रत्येक राज्य को उसके पहले अक्षर से सूचित किया गया है।
सप्त-राज्य-समूहः + अयम् + भगिनी-सप्तकम् + मतम्।
अर्थः — ‘अ’ से आरम्भ होने वाले दो, ‘म’ से आरम्भ होने वाले तीन, ‘न’ तथा ‘त्रि’ से युक्त (एक-एक) — इस प्रकार यह सात राज्यों का समूह ‘भगिनीसप्तक’ (सात बहनें) माना गया है।
| श्लोक का सङ्केत | कितने | राज्यानि |
|---|---|---|
| अ-द्वयम् | २ | अरुणाचलप्रदेशः, असमः |
| म-त्रयम् | ३ | मणिपुरम्, मेघालयः, मिजोरमः |
| न-युक्तम् | १ | नागालैण्डम् |
| त्रि-युक्तम् | १ | त्रिपुरा |
| योगः | ७ | भगिनीसप्तकम् |
भावः — कवि ने सात राज्यों के नाम याद रखने का सरल उपाय दिया है — आद्याक्षर के आधार पर गणना। ‘अ’ के दो, ‘म’ के तीन, ‘न’ का एक और ‘त्रि’ का एक — कुल सात। यही ‘सप्तभगिन्यः’ हैं।