दीपकम् अध्याय 8 श्लोक-व्याख्या (पदच्छेदः · अन्वयः · अर्थः · भावः)

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अद्वयं मत्रयं चैव न-त्रि-युक्तं तथाद्वयम्।
सप्तराज्यसमूहोऽयं भगिनीसप्तकं मतम्॥ — अस्य श्लोकस्य पदच्छेदम्, अन्वयम्, अर्थं भावं च लिखत।
उत्तर

यह श्लोक पहेली की शैली में सातों बहनों के नाम गिनाता है — प्रत्येक राज्य को उसके पहले अक्षर से सूचित किया गया है।

पदच्छेदः — अ-द्वयम् + मत्रयम् + च + एव + न-त्रि-युक्तम् + तथा + अद्वयम्।
सप्त-राज्य-समूहः + अयम् + भगिनी-सप्तकम् + मतम्।
अन्वयः — अ-द्वयम्, म-त्रयम्, न-त्रि-युक्तं च एव, तथा अद्वयम् (इति) अयं सप्तराज्यसमूहः भगिनीसप्तकं मतम्।

अर्थः — ‘अ’ से आरम्भ होने वाले दो, ‘म’ से आरम्भ होने वाले तीन, ‘न’ तथा ‘त्रि’ से युक्त (एक-एक) — इस प्रकार यह सात राज्यों का समूह ‘भगिनीसप्तक’ (सात बहनें) माना गया है।

श्लोक का सङ्केतकितनेराज्यानि
अ-द्वयम्अरुणाचलप्रदेशः, असमः
म-त्रयम्मणिपुरम्, मेघालयः, मिजोरमः
न-युक्तम्नागालैण्डम्
त्रि-युक्तम्त्रिपुरा
योगःभगिनीसप्तकम्

भावः — कवि ने सात राज्यों के नाम याद रखने का सरल उपाय दिया है — आद्याक्षर के आधार पर गणना। ‘अ’ के दो, ‘म’ के तीन, ‘न’ का एक और ‘त्रि’ का एक — कुल सात। यही ‘सप्तभगिन्यः’ हैं।

व्याकरण-सङ्केत: ‘अद्वयम्’, ‘मत्रयम्’, ‘भगिनीसप्तकम्’ — तीनों नपुंसकलिङ्ग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन के समूहवाचक पद हैं (द्वयम्, त्रयम्, सप्तकम् = समुदाय)। ‘मतम्’ भी नपुंसकलिङ्ग प्रथमा एकवचन — विधेय-विशेषण के रूप में प्रयुक्त।
प्र2.
तेन युक्तो लघुः भ्राता सिक्किमः इति विश्रुतः।
पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्॥ — अस्य श्लोकस्य पदच्छेदम्, अन्वयम्, अर्थं भावं च लिखत।
उत्तर

यही श्लोक पाठ का शीर्षक भी है — इसमें आठवाँ राज्य सिक्किम जोड़कर सम्पूर्ण ऐशान्य कोण को देखने का निमन्त्रण दिया गया है।

पदच्छेदः — तेन + युक्तः + लघुः + भ्राता + सिक्किमः + इति + विश्रुतः।
पश्यत + कोणम् + ऐशान्यम् + भारतस्य + मनोहरम्।
अन्वयः — तेन युक्तः लघुः भ्राता सिक्किमः इति विश्रुतः। (यूयं) भारतस्य मनोहरम् ऐशान्यं कोणं पश्यत।

अर्थः — उस (सप्तराज्यसमूह) के साथ जुड़ा हुआ छोटा भाई ‘सिक्किम’ नाम से प्रसिद्ध है। (हे छात्रो!) भारत के मनोहर ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण को देखो।

भावः — सात बहनों के साथ आठवाँ राज्य सिक्किम ‘लघु भ्राता’ के रूप में जुड़ता है — इसीलिए पूरा समूह ‘अष्टभगिन्यः’ अथवा ‘सप्तभगिन्यः एकः भ्राता च’ कहलाता है। दूसरी पंक्ति में कवि ‘पश्यत’ (लोट्लकार, मध्यमपुरुष, बहुवचन) कहकर पाठक को इस सुन्दर पूर्वोत्तर भारत की ओर आँख उठाने का आमन्त्रण देता है।

‘ऐशान्यं कोणम्’ क्या है: ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ पेटी के अनुसार ईशानी = North-East। भारत के मानचित्र में यही उत्तर-पूर्वी कोना है, जहाँ ये आठ राज्य बसे हैं। ‘मनोहरम्’ तथा ‘ऐशान्यम्’ दोनों ‘कोणम्’ के विशेषण हैं — नपुंसकलिङ्ग, द्वितीया विभक्ति, एकवचन।
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