कुतूहल अध्याय 11 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चित्र 11.5 (क) में आप यह देख सकते हैं कि नवचंद्र (अमावस्या) के दिन चंद्रमा सूर्य के निकटतम दृष्टिगोचर होता है और पूर्णचंद्र (पूर्णिमा) के दिन चंद्रमा सूर्य से सबसे अधिक दूर दिखाई देता है। क्या हमने क्रियाकलाप 11.1 में भी यही अवलोकन नहीं किया था?
उत्तर

हाँ — यह वही परिणाम है, जिस तक हम दो भिन्न रास्तों से पहुँचे हैं।

  • क्रियाकलाप 11.1 में आपने ‘चंद्रमा और सूर्य के बीच आकाश में दूरी’ वाला स्तंभ भरा था। क्षीयमाण पखवाड़े भर आप उसमें कम हुई लिखते रहे और साथ ही चमकीला भाग भी घटा लिखते रहे; वर्धमान पखवाड़े में दोनों प्रविष्टियाँ उलट गईं।
  • चित्र 11.5 (क) में इसका कारण दिख जाता है। स्थिति ‘न’ पर चंद्रमा सूर्य की दिशा में है, अतः पृथ्वी से दोनों आकाश में साथ-साथ दिखते हैं; स्थिति ‘त’ पर चंद्रमा दूसरी ओर है, अतः दोनों आकाश के विपरीत छोरों पर दिखते हैं।
ऐसा क्यों होता है: अवलोकन और चित्र एक ही ज्यामिति के दो दृश्य हैं। पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा और सूर्य के बीच का कोण ही यह तय करता है कि दीप्त भाग का कितना अंश हमारी ओर होगा। अतः दूरी और कला में कभी विरोध हो ही नहीं सकता — पूर्णचंद्र को आकाश में सूर्य से दूर होना ही पड़ेगा और पतले बालचंद्र को उसके समीप।
स्वयं देखिए: पूर्णिमा की संध्या को जब सूर्य पश्चिम में अस्त हो रहा हो तब पूर्व दिशा में देखिए। चंद्रमा ठीक अस्त होते सूर्य के सम्मुख उदित होता मिलेगा।
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