कक्षा ८ विज्ञान अध्याय 11 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
चित्र 11.5 (क) में आप यह देख सकते हैं कि नवचंद्र (अमावस्या) के दिन चंद्रमा सूर्य के निकटतम दृष्टिगोचर होता है और पूर्णचंद्र (पूर्णिमा) के दिन चंद्रमा सूर्य से सबसे अधिक दूर दिखाई देता है। क्या हमने क्रियाकलाप 11.1 में भी यही अवलोकन नहीं किया था?
सूर्य की किरणेंतथदधनपफबदिन 1दिन 4दिन 8दिन 12दिन 15दिन 18दिन 22दिन 26चंद्रमा का पूर्ण दीप्तभाग देखा जा सकताहै (पूर्ण चंद्रमा)।चंद्रमा के दीप्त भाग काआधे से अधिक अंश देखाजा सकता है(अर्धाधिक कला)।चंद्रमा के दीप्त भाग काआधे से अधिक अंश देखाजा सकता है(अर्धाधिक कला)।चंद्रमा के दीप्त भाग काआधा अंश देखा जा सकता है।चंद्रमा के दीप्त भाग काआधा अंश देखा जा सकता है।चंद्रमा के दीप्त भाग काआधे से कम अंश देखाजा सकता है(बालचंद्र कला)।चंद्रमा का दीप्त भागनहीं देखा जा सकताहै (नवचंद्र)।चंद्रमा के दीप्त भाग काआधे से कम अंश देखाजा सकता है(बालचंद्र कला)।
चित्र 11.5 (क), पृष्ठ 176 — पुनःआरेखित: पृथ्वी के परितः अपनी कक्षा में चंद्रमा की आठ स्थितियाँ; सूर्य की किरणें दाईं ओर से आ रही हैं। प्रत्येक चंद्रमा पर नारंगी असतत रेखा पृथ्वी की ओर उन्मुख भाग को चिह्नित करती है। इस चित्र में दर्शाए गए आमाप और दूरियाँ वास्तविक अनुपात में नहीं हैं।
उत्तर

हाँ — यह वही परिणाम है, जिस तक हम दो भिन्न रास्तों से पहुँचे हैं।

  • क्रियाकलाप 11.1 में आपने ‘चंद्रमा और सूर्य के बीच आकाश में दूरी’ वाला स्तंभ भरा था। क्षीयमाण पखवाड़े भर आप उसमें कम हुई लिखते रहे और साथ ही चमकीला भाग भी घटा लिखते रहे; वर्धमान पखवाड़े में दोनों प्रविष्टियाँ उलट गईं।
  • चित्र 11.5 (क) में इसका कारण दिख जाता है। स्थिति ‘न’ पर चंद्रमा सूर्य की दिशा में है, अतः पृथ्वी से दोनों आकाश में साथ-साथ दिखते हैं; स्थिति ‘त’ पर चंद्रमा दूसरी ओर है, अतः दोनों आकाश के विपरीत छोरों पर दिखते हैं।
ऐसा क्यों होता है: अवलोकन और चित्र एक ही ज्यामिति के दो दृश्य हैं। पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा और सूर्य के बीच का कोण ही यह तय करता है कि दीप्त भाग का कितना अंश हमारी ओर होगा। अतः दूरी और कला में कभी विरोध हो ही नहीं सकता — पूर्णचंद्र को आकाश में सूर्य से दूर होना ही पड़ेगा और पतले बालचंद्र को उसके समीप।
स्वयं देखिए: पूर्णिमा की संध्या को जब सूर्य पश्चिम में अस्त हो रहा हो तब पूर्व दिशा में देखिए। चंद्रमा ठीक अस्त होते सूर्य के सम्मुख उदित होता मिलेगा।
क्या यह उपयोगी रहा?