प्र1.
परंतु इन आवर्ती घटनाओं का काल-निर्धारण हेतु उपयोग कैसे किया जाता है?
उत्तर
उन्हें गिनकर। कोई भी घटना जो निश्चित अंतराल के बाद दोहराती हो, मात्रक बन सकती है, और समय मापना केवल यह गिनना है कि ऐसे कितने अंतराल बीत चुके हैं। इस अध्याय के तीन चक्र हमें वे तीन मात्रक देते हैं जो आज भी प्रयोग में हैं।
| प्राकृतिक चक्र | वास्तव में क्या गति कर रहा है | अवधि | परिभाषित मात्रक |
|---|---|---|---|
| सूर्य का आकाश में उच्चतम स्थिति पर लौटना | पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन | 24 घंटे | (माध्य सौर) दिन |
| चंद्रमा की कलाओं का एक पूर्ण चक्र | पृथ्वी के परितः चंद्रमा का परिक्रमण | लगभग 29.5 दिन | मास |
| ऋतुओं का पुनः वहीं लौट आना | सूर्य के परितः पृथ्वी का परिक्रमण | लगभग 365¼ दिन | वर्ष |
ऐसा क्यों होता है: कालदर्शक और कुछ नहीं, छोटी गिनतियों को बड़ी गिनतियों में सुव्यवस्थित रूप से बैठाने की एक योजना है। कठिनाई — और भिन्न-भिन्न प्रकार के कालदर्शकों के होने का कारण — यह है कि ये तीनों चक्र एक-दूसरे के पूर्ण गुणज नहीं हैं। 12 चंद्र मास 354 दिनों के होते हैं, 365 के नहीं, और वर्ष भी पूर्ण संख्या में दिन नहीं है। अध्याय का प्रत्येक कालदर्शक इन्हीं दो बची हुई त्रुटियों को सँभालने का एक-एक तरीका है।