प्र1.
संध्या होते ही जब मैं रात्रि-आकाश पर दृष्टिपात करती हूँ तो मैं कुछ तारों को गति करते हुए देखती हूँ। ये क्या हैं? क्या इनकी गति भी आवर्ती है?
उत्तर
वे तारे हैं ही नहीं — वे पृथ्वी की परिक्रमा करते कृत्रिम उपग्रह हैं। (वायुयान भी कुछ ऐसा ही दिखता है, परंतु उसमें लाल-हरी बत्तियाँ टिमटिमाती हैं; उपग्रह में नहीं।)
उपग्रह की पहचान —
- वह स्थायी अथवा हल्की टिमटिमाती चमक वाला प्रकाश-बिंदु होता है, जिसमें कोई रंग नहीं होता।
- वह स्पष्ट रूप से और तीव्र गति से चलता है और कुछ ही मिनटों में आकाश का बड़ा भाग पार कर जाता है, जबकि वास्तविक तारे एक-दूसरे के सापेक्ष स्थिर रहते हैं।
- वह सूर्यास्त के ठीक पश्चात अथवा सूर्योदय से ठीक पूर्व दिखता है। यही सबसे बड़ा संकेत है — वह स्वयं नहीं चमकता, बल्कि सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है, अतः नीचे भूमि पर अंधकार होते हुए भी ऊपर उस तक सूर्य का प्रकाश पहुँचता रहना चाहिए।
हाँ, इनकी गति आवर्ती है। इनमें से अधिकांश पृथ्वी की सतह से लगभग 800 किलोमीटर ऊपर परिक्रमा करते हैं और एक परिक्रमा में लगभग 100 मिनट लेते हैं।
एक दिन में परिक्रमाएँ = 24 × 60 मिनट ÷ 100 मिनट
= 1440 ÷ 100 = लगभग 14 परिक्रमाएँ प्रतिदिन
= 1440 ÷ 100 = लगभग 14 परिक्रमाएँ प्रतिदिन
यह क्यों महत्त्वपूर्ण है: आवर्तकाल निश्चित होने के कारण उनका गुजरना पहले से परिकलित किया जा सकता है — क्रियाकलाप 11.4 के मोबाइल ऐप और वेबसाइट ठीक यही करते हैं। यही कारण चंद्रमा को कालदर्शक के लिए उपयोगी बनाता है: जो गति नियमित रूप से दोहराए उसे गिना जा सकता है, और जिसे गिना जा सके उससे समय मापा जा सकता है।
क्या आप जानते हैं? चंद्रमा हमारा प्राकृतिक उपग्रह है। भारत के कृत्रिम उपग्रह भिन्न-भिन्न कार्य करते हैं — कार्टोसैट मानचित्रों, नगर-नियोजन और आपदा प्रबंधन हेतु पृथ्वी के चित्र लेता है जिनका उपयोग ‘भुवन’ मंच करता है, जबकि एस्ट्रोसैट बाहर की ओर तारों तथा अन्य खगोलीय पिंडों का अवलोकन करता है।