कुतूहल अध्याय 12 क्रियाकलाप 12.10

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कृषकों से प्रश्न पूछने के लिए एक सूची तैयार कीजिए जिससे यह ज्ञात किया जा सके कि वे कौन-से पीड़कनाशकों और अन्य कृषि सामग्री का उपयोग करते हैं। साथ ही यह भी जान सकें कि क्या वे अपनी फसलों को और अधिक अच्छा बनाने के लिए पदार्थों का पुन: उपयोग या पुनर्चक्रण करते हैं।
उत्तर

प्रश्न छोटे, खुले और इस विषय पर रखिए कि किसान वास्तव में करता क्या है — यह नहीं कि उसके विचार से क्या ठीक है। ले जाने योग्य एक अच्छी सूची—

  1. आप कौन-सी फसलें उगाते हैं और किस ऋतु में?
  2. क्या आप एक ही खेत में हर वर्ष वही फसल उगाते हैं या फसल चक्र अपनाते हैं?
  3. आप कौन-से उर्वरक उपयोग करते हैं — गोबर की खाद, कंपोस्ट, संश्लेषित उर्वरक? कितनी मात्रा में?
  4. आप कौन-से पीड़कनाशक छिड़कते हैं, एक ऋतु में कितनी बार, और यह कैसे तय करते हैं कि कब छिड़कना है?
  5. छिड़काव के समय आप क्या सुरक्षा साधन पहनते हैं?
  6. क्या आप फसल अवशेष, गोबर या रसोई के अपशिष्ट से कंपोस्ट बनाते हैं?
  7. सिंचाई का जल कहाँ से आता है — नहर, तालाब या नलकूप? क्या जलस्तर बदला है?
  8. पहले की तुलना में अब आपके खेत में कौन-से पक्षी, कीट और केंचुए दिखाई देते हैं?
  9. बीज कहाँ से आता है — अपना सहेजा हुआ या हर वर्ष खरीदा हुआ?
संकेत: "कितनी बार" और "कितनी मात्रा" पूछिए, "क्या बहुत अधिक उपयोग करते हैं" नहीं। संख्याओं की तुलना विभिन्न किसानों के बीच हो सकती है, विचारों की नहीं।
प्र2.
समय के साथ आपकी कृषि पद्धतियों में किस प्रकार परिवर्तन हुए हैं और क्यों?
उत्तर

किसान द्वारा दिया गया नमूना उत्तर: "जब मैं छोटा था तब हम मिलाकर बोते थे — बाजरे के साथ मोठ — और अपने ही पशुओं के गोबर की खाद डालते थे। लगभग 1990 के दशक से मैंने एक ही फसल, संकर बीज, यूरिया-डीएपी और नलकूप अपना लिया, क्योंकि प्रति बीघा उपज अधिक थी और मंडी को मात्रा में एक ही फसल चाहिए थी। अब मुझे ऋतु में कम से कम तीन बार छिड़काव करना पड़ता है, जो पहले कभी नहीं करना पड़ता था।"

किसान प्राय: ये कारण बताते हैं—

  • एक ही बिकाऊ फसल से अधिक उपज और बेहतर मूल्य;
  • घर में पशु कम हो जाने से गोबर की खाद कम उपलब्ध;
  • नए बीज जो उर्वरक पर अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं;
  • श्रमिकों की कमी, जिसने मशीनों और रसायनों की ओर धकेला।
ऐसा क्यों होता है: यह अध्याय में वर्णित परिवर्तन का स्थानीय रूप है। 1950 से 1965 के बीच भारत को कम फसल उत्पादन के कारण खाद्य संकट का सामना करना पड़ा; 20वीं शताब्दी के मध्य से ट्रैक्टरों, मशीनों, संश्लेषित उर्वरकों और पीड़कनाशकों ने उत्पादन बढ़ाने में सहायता की, और इस काल को हरित क्रांति कहा जाता है। इसने वास्तव में भारत को खाद्य सुरक्षा दी। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि दशकों तक भारी मात्रा में उपयोग की गई वही पद्धतियाँ मृदा को घिसा देती हैं।
प्र3.
संश्लेषित उर्वरकों और पीड़कनाशकों का उपयोग करने पर आपको क्या प्रभाव दिखाई देते हैं?
उत्तर

किसान द्वारा दिया गया नमूना उत्तर: "यूरिया के बाद फसल शीघ्र हरी हो जाती है और आरंभ के वर्षों में उपज अच्छी रहती है। पर अब वही परिणाम पाने के लिए मुझे अधिक डालना पड़ता है। छिड़काव के बाद पीड़क पंद्रह दिन के लिए जाता है और फिर पहले से अधिक होकर लौटता है, और फसल में जो सोनपंखी भृंग तथा मकड़ियाँ रहती थीं वे अब नहीं दिखतीं। जुताई करते समय केंचुए भी कम मिलते हैं।"

किन प्रभावों पर ध्यान दें और उनके पीछे का कारण—

किसान क्या देखता हैवास्तव में क्या हो रहा है
उतनी ही उपज के लिए अधिक उर्वरकहितैषी सूक्ष्मजीवों और ह्यूमस के घटने से मृदा की उर्वरता गिर रही है
पीड़क शीघ्र लौटते हैं और कठिनाई से मरते हैंकुछ पीड़क पीड़कनाशकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं
खेत में मकड़ियाँ, भृंग और पक्षी कमपीड़कनाशक प्राकृतिक परभक्षियों की संख्या घटाते हैं, जिससे अंतत: पीड़कजीवों की समष्टि बढ़ जाती है
पुष्पन के समय मधुमक्खियाँ कमपरागणकारी प्रभावित होते हैं — और वे खाद्य उत्पादन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं
क्या आप जानते हैं? चित्र 12.18 इसका विकल्प दिखाता है — कीटों को खाने वाला भृंग। यह शिकारियों द्वारा कीटों का प्राकृतिक नियंत्रण है, और किसान को इसका कोई मूल्य नहीं देना पड़ता।
प्र4.
क्या आपने इन संश्लेषित उर्वरकों और पीड़कनाशकों के उपयोग के पश्चात मृदा स्वास्थ्य में कोई परिवर्तन देखा है?
उत्तर

किसान द्वारा दिया गया नमूना उत्तर: "मृदा कठोर और फीकी पड़ गई है। पहले से अधिक जल माँगती है और शीघ्र सूख जाती है। पहले ऊपरी परत गहरे रंग की, भुरभुरी और केंचुओं से भरी रहती थी; अब वर्षा के बाद ऊपरी मृदा बहकर नाली में चली जाती है।"

मृदा स्वास्थ्य गिरने के लक्षण और उनका कारण—

  • मृदा कठोर और फीकी — मृदाकणों को जोड़े रखने वाला जैविक पदार्थ (ह्यूमस) घट गया है।
  • ऊपरी मृदा बह जाती है — पर्याप्त ह्यूमस के अभाव में मृदा अपरदन के लिए प्रवण हो जाती है
  • केंचुए और घोंघे कम — अत्यधिक सिंचाई और बार-बार जुताई इन मृदा जीवों को प्रभावित करती है, जो पारिस्थितिकीय संतुलन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
  • जल या तो बह जाता है या भरा रहता है — ह्यूमस में कम मृदा जल को ठीक से नहीं थामती।
ऐसा क्यों होता है: मृदा केवल पिसी हुई चट्टान नहीं, एक सजीव तंत्र है। संश्लेषित उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से उसमें हितैषी सूक्ष्मजीव और जैविक पदार्थ घटते हैं, अर्थात मृदा का वह भाग सबसे पहले नष्ट होता है जो सजीव है — और जो खनिज भाग को उपयोगी बनाता है। इसीलिए रसायन जारी रहने पर भी उपज गिरती है।
प्र5.
कृषकों के साथ अपनी बातचीत से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर

रिपोर्ट चार भागों में बनाइए — (i) आप कब और कहाँ गए तथा कितने किसानों से मिले; (ii) उनके उत्तरों की तालिका; (iii) अधिकांश ने किन बातों पर एक जैसी बात कही; (iv) आपका निष्कर्ष।

नमूना निष्कर्ष: संश्लेषित उर्वरकों और पीड़कनाशकों ने फसल उत्पादन में सुधार लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है और भारत जैसे देशों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने में सहायता की है। परंतु हमसे मिले हर किसान ने वही धीमा परिवर्तन बताया — उतनी ही उपज के लिए अधिक सामग्री, पीड़कों का अधिक बल के साथ लौटना, केंचुओं और परागणकारियों का घटना, और ऊपरी मृदा का बह जाना। अर्थात लाभ पहले मिला और मूल्य बाद में चुकाना पड़ा, और वह मूल्य स्वयं मृदा चुका रही है।

इससे वही निष्कर्ष निकलता है जो अध्याय का अपना है — पारितंत्र को समझने से हमें और अधिक संधारणीय कृषि पद्धतियाँ अपनाने में सहायता मिल सकती है। हमसे मिले कुछ किसान पहले से ही जैविक और प्राकृतिक पद्धतियों की खोज कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य संश्लेषित सामग्री घटाना और प्राकृतिक पारितंत्र में न्यूनतम हस्तक्षेप करना है।

स्वयं जाँचिए: रिपोर्ट तब अधिक सशक्त होती है जब किसान ने क्या कहा और आपने क्या निष्कर्ष निकाला — ये दोनों अलग-अलग खंडों में हों, ताकि पाठक आपके तर्क को जाँच सके।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ