एक संभावित कारण — मछलियाँ पादपों को सीधे प्रभावित कर ही नहीं रहीं; वे उन कीटों को प्रभावित कर रही हैं जो पादपों का परागण करते हैं।
कड़ियाँ देखिए। मछलियाँ व्याधपतंग के लार्वा खाती हैं, जो जल में रहते हैं। वयस्क व्याधपतंग मक्खियाँ, मधुमक्खियाँ और तितलियाँ खाते हैं, जो तालाब के ऊपर वायु में उड़ते हैं और आस-पास के पुष्पों पर जाते हैं। अत:—
तालाब ‘ख’: मछलियाँ नहीं → लार्वा बच जाते हैं → व्याधपतंग अधिक → मधुमक्खियाँ और तितलियाँ कम → कम परागण → कम बीज
इसीलिए तालाब ‘क’ के आस-पास पुष्पीय पादप बड़ी संख्या में हैं और तालाब ‘ख’ के आस-पास कम।