प्र1.
हम वनों, नदियों और आर्द्रभूमि को होने वाली क्षति को कैसे रोक सकते हैं? विचार कीजिए कि आप और आपका समुदाय इन महत्त्वपूर्ण स्थानों की रक्षा के लिए क्या कर सकते हैं।
उत्तर
आरंभ वहाँ से कीजिए जहाँ से क्षति हो रही है। अध्याय उसे नाम देता है — वनों की कटाई, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग, आक्रामक प्रजातियों की संख्या बढ़ना, भूमि का असंधारणीय उपयोग और प्रदूषण। हर एक का एक उत्तर है।
| क्षति | समुदाय क्या कर सकता है |
|---|---|
| ईंधन के लिए वृक्षों की कटाई | ईंधन-कुशल चूल्हे और बायोगैस का उपयोग; शीघ्र बढ़ने वाले स्थानीय वृक्षों का एक अलग खंड लगाना, ताकि प्राकृतिक वन न कटे |
| नदियों में अनुपचारित वाहित मल और औद्योगिक अपशिष्ट | गाँव और नगर का अपशिष्ट जल नदी तक पहुँचने से पहले उपचारित हो, इसका आग्रह करना; ठोस कचरा नालियों में न डालना |
| आर्द्रभूमि का पाटा जाना | गाँव के तालाब और ताल की गाद निकालते रहना और उन्हें उपयोग में रखना — जिस तालाब की गाँव को आवश्यकता होती है, गाँव उसकी रक्षा भी करता है |
| वन संसाधनों का अत्यधिक उपयोग और अवैध शिकार | संरक्षित क्षेत्रों का समर्थन — राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र |
| आक्रामक प्रजातियाँ | तालाबों और सड़क किनारों से उन्हें हटाकर उनके स्थान पर देशी प्रजातियाँ लगाना |
| कचरा और प्लास्टिक | कचरे का पृथक्करण, एकल-उपयोग प्लास्टिक से इनकार, स्वच्छता दिवस का आयोजन |
ऐसा क्यों होता है: इनमें से अधिकांश स्थान किसी एक बड़े कार्य से नहीं, अनेक छोटे-छोटे कार्यों से क्षतिग्रस्त होते हैं — इसलिए वे अनेक छोटे-छोटे कार्यों से ही सुधरते भी हैं। और यह करने योग्य है: ये पारितंत्र हमें शुद्ध वायु, उपजाऊ मृदा, भोजन, रेशे, इमारती लकड़ी, औषधियाँ और जल देते हैं तथा तूफानों में हमारी रक्षा करते हैं — ऐसे लाभ जो मानव उत्तरजीविता और स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।