कुतूहल अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या हमें अन्य स्थानों पर भी सूक्ष्मजीव मिलते हैं?
उत्तर

हाँ — सूक्ष्मजीव सर्वत्र पाए जा सकते हैं।

  • जल, मृदा और वायु में, और यहाँ तक कि कुछ खाद्य पदार्थों में भी।
  • पौधों की पत्तियों, तनों, जड़ों अथवा किसी भी अन्य भाग की सतह पर — इन्हें सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है।
  • चरम जलवायु परिस्थितियों में भी, जैसे गरम पानी के झरने और बर्फीले ठंडे क्षेत्र, तथा साधारण औसत तापमान में भी।
  • हमारे अपने शरीर के भीतर, विशेषकर हमारी आँत में। जैसा आपने कक्षा 7 की पुस्तक जिज्ञासा के अध्याय ‘जंतुओं में जैव प्रक्रम’ में पढ़ा है, हमारी आँत में अनेक जीवाणु होते हैं जो पाचन में सहायता करते हैं।
ये सर्वत्र क्यों हैं: सूक्ष्मजीव अत्यंत छोटे और अत्यंत विविध हैं। पौधों और जंतुओं की भाँति ये भी आकार, आमाप और संरचना में भिन्न होते हैं — गोलाकार, छड़ाकार, सर्पिल, कॉमा जैसे या अनियमित — और इसी विविधता के कारण पृथ्वी की लगभग हर परिस्थिति के लिए, चाहे गरम हो या ठंडी, नम हो या शुष्क, कोई न कोई सूक्ष्मजीव उपलब्ध है जो उसमें रह सके।
प्र2.
क्या आपने कभी नींबू, टमाटर, संतरा या किसी अन्य खाद्य पदार्थ को कुछ समय के लिए बाहर रखे रहने के बाद सड़ते हुए देखा है? यदि हाँ, तो आपने उन पर पाउडर या रुई जैसी वृद्धि देखी होगी (चित्र 2.9)। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे सूक्ष्मजीवों से संक्रमित हो गए हैं लेकिन ये सूक्ष्मजीव कहाँ से आए? वे भोजन के संपर्क में कैसे आए?
उत्तर

ये आस-पास से ही आए — वायु से, जिस सतह पर फल रखा था उससे, जिस जल से उसे धोया गया उससे और उन हाथों से जिन्होंने उसे छुआ। सूक्ष्मजीव सर्वत्र उपस्थित हैं — जल, मृदा और वायु में — अत: खुले में रखा फल कभी भी सूक्ष्मजीव-रहित स्थान पर नहीं होता।

फिर फल पर स्वयं क्या होता है —

  1. वायु से तथा जिस सतह पर वह रखा है उससे कवक और जीवाणु के अत्यंत सूक्ष्म रूप उसके छिलके पर आ बैठते हैं।
  2. पका फल उन्हें वह सब देता है जो चाहिए — वह नम है, शर्करा से भरा है और कमरा गरम है। ये ठीक वही स्थितियाँ हैं जिनमें सूक्ष्मजीव वृद्धि करते हैं।
  3. छिलके पर कोई खरोंच या कटाव उन्हें भीतर के गूदे तक पहुँचा देता है।
  4. वे गुणन करते हैं। कवक शाखित तंतुओं के रूप में बढ़ता है, इसीलिए आपको रुई जैसी या पाउडर जैसी वृद्धि दिखती है — आप एक जीव को नहीं, इतने बड़े समूह को देख रहे हैं कि वह नग्न आँखों से दिख जाए।
यह सड़न क्यों दिखती है: सूक्ष्मजीव भोजन ले रहे हैं। वे फल के जटिल पदार्थों को सरल पदार्थों में विघटित कर रहे हैं — ठीक उसी प्रक्रिया से जिससे वे गिरी पत्तियों को खाद में बदलते हैं। इसीलिए फल मुलायम पड़ जाता है, काला पड़ता है और उसमें गंध आने लगती है।
स्वयं जाँचिए: एक ही फल के दो समान टुकड़े रखिए — एक खुले में और एक रेफ्रिजरेटर में। ठंडा टुकड़ा कहीं अधिक समय तक ताज़ा रहेगा, क्योंकि निम्न तापमान इन जीवों की वृद्धि को धीमा कर देता है — उन्हें हटाता नहीं।
प्र3.
परंतु सूक्ष्मजीव अचार और मुरब्बों को संक्रमित क्यों नहीं करते?
उत्तर

क्योंकि उनमें क्या मिलाया जाता है, यही निर्णायक है। पुस्तक का अपना उत्तर — आप उनमें नमक या चीनी के साथ अनेक मसाले मिलाते हैं जो परिरक्षक (प्रिजर्वेटिव) का काम करते हैं। नमक या चीनी की अधिक मात्रा इन जीवों को पनपने नहीं देती।

तेज़ नमक या चीनी का घोल इन्हें क्यों रोक देता है: कोई भी सूक्ष्मजीव केवल वहीं वृद्धि कर सकता है जहाँ उसे उपयोग करने योग्य जल मिले। अचार में लगभग सारा जल अत्यंत तेज़ नमक के घोल में बँधा होता है और मुरब्बे में गाढ़ी चाशनी में, अत: सूक्ष्मजीव के लिए मुक्त जल बचता ही नहीं। इससे भी बड़ी बात यह कि कोशिका के बाहर इतना तेज़ घोल उसकी कोशिका झिल्ली से जल बाहर खींच लेता है, जिससे कोशिका सिकुड़ जाती है और गुणन नहीं कर पाती। अचार के ऊपर तेल की परत सतह को नम वायु से दूर रखकर और सहायता करती है।
क्या आप जानते हैं? इसीलिए हमारी दादी-नानी अचार के मर्तबान में सदा सूखा चम्मच डालने पर ज़ोर देती थीं। जल की एक बूँद ठीक उसी स्थान पर नमक की सांद्रता घटा देती है — और फफूँद सबसे पहले वहीं दिखाई देती है।
प्र4.
सूक्ष्मजीवों की विविधता हमारे दैनिक जीवन में क्या भूमिका निभाती है? वे पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में कैसे सहायता करते हैं?
उत्तर

भिन्न-भिन्न सूक्ष्मजीव हमारे लिए भिन्न-भिन्न कार्य करते हैं, और इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य है अपशिष्ट को विघटित करना।

कहाँकौन-सा सूक्ष्मजीवहमारे लिए क्या करता है
मृदा और खाद का गड्ढाकवक और जीवाणुपादप अपशिष्ट और मृत जंतुओं के शरीर पर क्रिया करके जटिल पदार्थों को सरल, पोषक-समृद्ध खाद में बदल देते हैं — विघटन। ये पोषक तत्व मिट्टी में लौट जाते हैं।
ऑक्सीजन रहित वातावरण, अपशिष्ट जलकुछ विशेष जीवाणुपादप और जंतु अपशिष्ट को विघटित करके बायोगैस निर्मुक्त करते हैं — मुख्यत: मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड — जो खाना पकाने, तापन, बिजली उत्पादन और वाहनों में प्रयुक्त होती है।
फलीदार पौधों की मूल ग्रंथिकाएँराइजोबियमवायु से नाइट्रोजन अवशोषित करके पौधे के लिए उपयोगी बनाता है, जिससे फसलें रासायनिक उर्वरकों के बिना भी अच्छी वृद्धि करती हैं।
रसोईघरखमीर, लैक्टोबैसिलसपावरोटी, केक और भटूरे को फुलाते हैं; इडली-दोसा के घोल का किण्वन करते हैं; दूध को दही में बदलते हैं।
हमारी आँतजीवाणुपाचन में सहायता करते हैं।
जलाशयसूक्ष्म शैवालसूर्य के प्रकाश से भोजन बनाते हैं और ऑक्सीजन निर्मुक्त करते हैं — पृथ्वी की आधी से अधिक ऑक्सीजन आपूर्ति; जलीय जीवों का भोजन बनते हैं; जल स्वच्छ करने और जैव-ईंधन बनाने में उपयोगी हैं।
प्रदूषित स्थानविशेष रूप से विकसित जीवाणुतेल रिसाव को विघटित करते हैं — आनंद मोहन चक्रवर्ती द्वारा वर्ष 1971 में विकसित जीवाणु।
विघटन ही सबसे बड़ी सेवा क्यों है: गिरी हुई पत्ती या मृत जंतु के पोषक तत्व ऐसे जटिल पदार्थों में बँधे रहते हैं जिन्हें पौधा ग्रहण नहीं कर सकता। सूक्ष्मजीव उन पदार्थों को सरल, पोषक-समृद्ध पदार्थों में तोड़ देते हैं जो घुलकर मिट्टी में लौट जाते हैं। यह चरण न हो तो अपशिष्ट ढेर होता जाएगा और पोषक तत्व कभी पुन: उपयोग में नहीं आएँगे — इसलिए सूक्ष्मजीव पर्यावरण को स्वच्छ भी करते हैं और उसका पुनर्चक्रण भी।
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