कुतूहल अध्याय 5 क्रियाकलाप 5.6

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अब इसे मेज पर रखे कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों को निकट लाइए, ध्यान रखिए कि आपका मापक या नलिका कागज के टुकड़ों को स्पर्श न करें (चित्र 5.8)। क्या आप कुछ आश्चर्यजनक देखते हैं?
उत्तर

हाँ। कागज के छोटे-छोटे टुकड़े मेज से उछलकर ऊपर आते हैं और प्लास्टिक मापक या नलिका से चिपक जाते हैं — यद्यपि मापक ने उन्हें स्पर्श तक नहीं किया।

आश्चर्य कागज के हिलने का नहीं, बल्कि इस बात का है कि वह अंतराल रहते हुए ही हिलता है। रगड़ने से पहले वही मापक उन्हीं टुकड़ों के ऊपर रखने पर कुछ नहीं करता। रगड़ने ने मापक को कागज को खाली स्थान के आर-पार खींच लेने की क्षमता दे दी है।

प्र2.
कागज के टुकड़े प्लास्टिक मापक या नलिका की ओर खिंचते हैं और जब इसे कागज के टुकड़ों के अधिक निकट लाया जाता है तो वे उससे चिपक जाते हैं। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

क्योंकि रगड़ने से मापक आवेशित वस्तु बन गया है, और आवेशित वस्तु अपने निकट रखी अनावेशित वस्तुओं पर स्थिरवैद्युत बल लगाती है।

जब कुछ निश्चित पदार्थों से बनी दो वस्तुओं को आपस में रगड़ा जाता है तो उनकी सतहों पर विद्युत आवेश उत्पन्न होते हैं। इन आवेशों को स्थैतिक आवेश कहा जाता है क्योंकि ये स्वयं गति नहीं करते; जिस वस्तु पर स्थैतिक आवेश आ जाता है उसे आवेशित वस्तु कहते हैं। एक आवेशित वस्तु कुछ पदार्थों से बनी अनावेशित वस्तुओं, जैसे कागज के छोटे टुकड़ों, को आकर्षित करती है अर्थात उन पर बल लगाती है। यह बल वस्तुओं के संपर्क में आए बिना भी लगता है — इसीलिए कागज मापक से स्पर्श होने से पहले ही उछल पड़ता है।

संकेत: यह क्रियाकलाप नमी वाले दिन असफल हो जाता है, और तब भी असफल होता है जब आप रगड़े हुए भाग को अपने हाथ या किसी धातु की वस्तु से स्पर्श कर लेते हैं। पुस्तक इसीलिए सावधान करती है — आवेश निकल जाता है और मापक पुन: साधारण हो जाता है।
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