क्योंकि रगड़ने से मापक आवेशित वस्तु बन गया है, और आवेशित वस्तु अपने निकट रखी अनावेशित वस्तुओं पर स्थिरवैद्युत बल लगाती है।
जब कुछ निश्चित पदार्थों से बनी दो वस्तुओं को आपस में रगड़ा जाता है तो उनकी सतहों पर विद्युत आवेश उत्पन्न होते हैं। इन आवेशों को स्थैतिक आवेश कहा जाता है क्योंकि ये स्वयं गति नहीं करते; जिस वस्तु पर स्थैतिक आवेश आ जाता है उसे आवेशित वस्तु कहते हैं। एक आवेशित वस्तु कुछ पदार्थों से बनी अनावेशित वस्तुओं, जैसे कागज के छोटे टुकड़ों, को आकर्षित करती है अर्थात उन पर बल लगाती है। यह बल वस्तुओं के संपर्क में आए बिना भी लगता है — इसीलिए कागज मापक से स्पर्श होने से पहले ही उछल पड़ता है।
संकेत: यह क्रियाकलाप नमी वाले दिन असफल हो जाता है, और तब भी असफल होता है जब आप रगड़े हुए भाग को अपने हाथ या किसी धातु की वस्तु से स्पर्श कर लेते हैं। पुस्तक इसीलिए सावधान करती है — आवेश निकल जाता है और मापक पुन: साधारण हो जाता है।