कुतूहल अध्याय 5 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
सभी वस्तुएँ पृथ्वी की ओर क्यों गिरती हैं?
उत्तर

क्योंकि पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपनी ओर आकर्षित (खींचती) है। यही खिंचाव गुरुत्वाकर्षण बल है।

ऊँचाई से गिराई गई वस्तु नीचे की ओर एक ऊर्ध्वाधर सरलरेखीय पथ पर गिरती है (चित्र 5.11, क) क्योंकि पृथ्वी उसे उसी दिशा में — अपनी ओर — खींचती है। ऊर्ध्वाधरतः ऊपर फेंकी गई वस्तु सीधी ऊपर जाती है, उसकी चाल धीमी होती जाती है, वह शीर्ष पर क्षण भर के लिए रुकती है और फिर एक सरलरेखीय पथ पर ऊर्ध्वाधरतः नीचे गिरती है (चित्र 5.11, ख)। ऊपर जाते समय उसकी चाल घटती जाती है और नीचे आते समय बढ़ती जाती है — दोनों परिवर्तन उसी एक नीचे की ओर लगने वाले खिंचाव से होते हैं। गुरुत्वीय बल के अधीन ऊर्ध्वाधर दिशा में होने वाली इस गति को ऊर्ध्वाधर गति कहते हैं।

प्र2.
क्या कोई बल है जो उन वस्तुओं पर लगता है? यह बल किसके कारण लगता है?
उत्तर

हाँ — गुरुत्वाकर्षण बल, और यह पृथ्वी के कारण लगता है।

पृथ्वी द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल गुरुत्वीय बल या केवल गुरुत्व भी कहलाता है। इसकी दो बातें स्मरण रखने योग्य हैं —

  • यह वस्तु के संपर्क में आए बिना उसे आकर्षित करता है, अत: यह एक असंपर्क बल है।
  • यह सदैव आकर्षी बल होता है, जबकि चुंबकीय बल या स्थिरवैद्युत बल आकर्षी या प्रतिकर्षी दोनों में से कोई भी हो सकता है।
प्र3.
क्या पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को समान बल से आकर्षित करती है?
उत्तर

नहीं। भिन्न-भिन्न वस्तुओं को भिन्न-भिन्न बलों से आकर्षित करती है, और क्रियाकलाप 5.9 इसे सीधे दिखा देता है।

एक कील से स्प्रिंग लटकाइए और उससे पेंसिल बॉक्स लटकाइए — स्प्रिंग की लंबाई बढ़ जाती है। वस्तु बदलिए, लंबाई-वृद्धि भी बदल जाती है। चूँकि यह वृद्धि लटकी हुई वस्तु पर पृथ्वी के खिंचाव के कारण होती है, अत: भिन्न वृद्धि का अर्थ है भिन्न खिंचाव। जिस बल से पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है उसी को उस वस्तु का भार कहते हैं, अत: यही कहना है कि भिन्न-भिन्न वस्तुओं का भार भिन्न-भिन्न होता है।

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