कुतूहल अध्याय 9 चर्चा के कुछ बिंदु

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप कितने चम्मच नमक जल में घोल पाए इससे पहले कि घोल में नमक का कुछ अंश अघुलनशील रह जाए?
उत्तर

आधे गिलास जल में, अर्थात लगभग 100 mL में, प्रायः छह से आठ समतल छोटे चम्मच नमक घुलता है, इसके बाद नमक तली पर बैठने लगता है। अपनी गिनती स्वयं लिखिए, क्योंकि वह आपके जल की मात्रा, आपके चम्मच और आपके कमरे के तापमान की गिनती है।

ऐसा क्यों होता है: कक्ष तापमान पर साधारण नमक की विलेयता 100 mL जल में लगभग 36 g होती है और एक समतल छोटे चम्मच में लगभग 5 g नमक आता है। अतः लगभग सात चम्मच अपेक्षित हैं — और यही कारण है कि यह संख्या मनमानी नहीं है, यह उस तापमान पर नमक और जल का निश्चित गुण है।
यह करके देखिए: अब केवल चौथाई गिलास जल लेकर यही कीजिए। आप पाएँगे कि लगभग आधे चम्मच ही घुलते हैं — इससे स्पष्ट होता है कि सीमा जल की मात्रा से तय होती है, नमक से नहीं।
प्र2.
यह जल की नमक घोलने की क्षमता के विषय में क्या इंगित करता है?
उत्तर

यह दर्शाता है कि जल की एक निश्चित मात्रा की एक निश्चित सीमा होती है — वह अनंत नमक नहीं घोल सकती। सीमा तक विलयन असंतृप्त रहता है; सीमा पर वह उस तापमान का संतृप्त विलयन बन जाता है और अतिरिक्त नमक बिना घुले तली पर पड़ा रहता है।

इस एक अवलोकन से तीन बातें निकलती हैं —

  • सीमा इस पर निर्भर करती है कि विलायक कितना है। दुगुना जल लगभग दुगुना नमक घोलेगा।
  • सीमा तापमान पर निर्भर करती है। जल गरम कीजिए तो वह अधिक नमक ले लेगा (क्रियाकलाप 9.2 यही बात बेकिंग सोडा के लिए दिखाता है)।
  • सीमा उस विलेय की उस विलायक में होती है। जल में चीनी, बेकिंग सोडा और नमक — तीनों की अपनी-अपनी सीमा है। विलायक की निश्चित मात्रा में घुलने वाली यही अधिकतम मात्रा विलेयता कहलाती है।
ऐसा क्यों होता है: जल का एक कण नमक के सीमित कणों को ही अलग रख सकता है। जब सभी जल-कण पहले से ही घुले हुए कणों को घेरने में लगे हों, तब अगले क्रिस्टल को तोड़ने के लिए कोई बचता ही नहीं — इसलिए वह क्रिस्टल ही बना रहता है।
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