कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा — घनत्व ठीक वही रहेगा, 2 g/cm³।
घन के रूप में: घनत्व = 120 g ÷ 60 cm³ = 2 g/cm³
पतले पत्रक के रूप में:
द्रव्यमान = अब भी 120 g (न कुछ जोड़ा गया, न हटाया गया)
आयतन = अब भी 60 cm³ (मृदा केवल पुनः व्यवस्थित हुई है, न दबाई गई न खींची गई)
घनत्व = 120 g ÷ 60 cm³ = 2 g/cm³
ऐसा क्यों होता है: समतल करने से आकृति बदलती है, पदार्थ की मात्रा और घेरा गया स्थान नहीं। जैसा अध्याय कहता है, पदार्थ का घनत्व उसके आकार या आकृति पर निर्भर नहीं करता; वह केवल तापमान और दाब पर निर्भर करता है। इनमें से कुछ भी नहीं बदला, अतः घनत्व भी नहीं बदलेगा।
संकेत: मृदा का पतला पत्रक जल पर तैर भी सकता है जबकि घन डूब जाता है — पर यह घनत्व का परिवर्तन नहीं है। यह आकृति का परिवर्तन है, और ठीक इसी कारण इस्पात का जहाज़ तैरता है जबकि इस्पात की कील नहीं।