कुतूहल अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपने ध्यान दिया होगा कि चावल धोते समय उसमें उपस्थित भूसी के कण जल की सतह पर तैरते हैं जबकि चावल पात्र की तली पर बैठ जाते हैं। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर

भूसी का घनत्व जल से कम है और चावल के दाने का घनत्व जल से अधिक, इसलिए भूसी सतह पर रह जाती है और चावल तली में बैठ जाता है।

ऐसा क्यों होता है: भूसी दाने का सूखा, कागज़-सा बाहरी आवरण है। वह पतली और खोखली होती है तथा उसमें वायु फँसी रहती है, अतः वह ठीक-ठाक आयतन घेरती है पर द्रव्यमान लगभग नहीं के बराबर रखती है — उसका घनत्व 1 g/cm³ से नीचे आ जाता है। भीतर का चावल का दाना मंड (स्टार्च) से ठसाठस भरा होता है और उसमें वायु का कोई स्थान नहीं होता, इसलिए उतने ही आयतन में कहीं अधिक द्रव्यमान होता है और उसका घनत्व 1 g/cm³ से ऊपर होता है। जल केवल घनत्व के अनुसार दोनों को छाँट देता है।
क्या आप जानते हैं? किसान शताब्दियों से इसी का उपयोग करते आए हैं। ओसाना इसी कारण से वायु में भूसी को अनाज से अलग करता है, और जल में भूसी को तैराकर हटाना उसी युक्ति का गीला रूप है।
प्र2.
वैज्ञानिक घनत्व को कैसे परिभाषित करते हैं?
उत्तर

किसी पदार्थ के इकाई आयतन में विद्यमान द्रव्यमान को उसका घनत्व कहते हैं।

घनत्व = द्रव्यमान / आयतन

SI मात्रक: किलोग्राम प्रति घन मीटर, kg/m³
द्रवों और छोटे ठोसों के लिए सुविधाजनक मात्रक: g/mL और g/cm³

घनत्व के दो गुण अभी से मन में बैठा लेने योग्य हैं —

  • यह टुकड़े की आकृति या आकार पर निर्भर नहीं करता। एक ग्राम लोहे और एक किलोग्राम लोहे का घनत्व बिलकुल समान होता है।
  • यह तापमान और दाब पर निर्भर करता है। दाब मुख्यतः गैसों के लिए महत्वपूर्ण है; ठोसों और द्रवों पर उसका प्रभाव नगण्य होता है।
यह परिभाषा ऐसी क्यों है: "लोहा लकड़ी से भारी है" कहना अस्पष्ट बात है — एक कील एक लट्ठे से हल्की होती है। आयतन को एक इकाई पर स्थिर कर देने से तुलना में से टुकड़े का आकार निकल जाता है और केवल पदार्थ का अपना गुण बचता है। इसी से घनत्व लोहे की छड़ और उतने ही आकार की लकड़ी की छड़ की उचित तुलना कर पाता है।
संकेत: अध्याय का अपना चित्र याद रखने योग्य है — भीड़ भरी बस उच्च घनत्व है, वही बस गिने-चुने लोगों के साथ कम घनत्व। बस (आयतन) नहीं बदली; लोगों की संख्या (द्रव्यमान) बदली।
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