प्र1.
आपने ध्यान दिया होगा कि चावल धोते समय उसमें उपस्थित भूसी के कण जल की सतह पर तैरते हैं जबकि चावल पात्र की तली पर बैठ जाते हैं। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर
भूसी का घनत्व जल से कम है और चावल के दाने का घनत्व जल से अधिक, इसलिए भूसी सतह पर रह जाती है और चावल तली में बैठ जाता है।
ऐसा क्यों होता है: भूसी दाने का सूखा, कागज़-सा बाहरी आवरण है। वह पतली और खोखली होती है तथा उसमें वायु फँसी रहती है, अतः वह ठीक-ठाक आयतन घेरती है पर द्रव्यमान लगभग नहीं के बराबर रखती है — उसका घनत्व 1 g/cm³ से नीचे आ जाता है। भीतर का चावल का दाना मंड (स्टार्च) से ठसाठस भरा होता है और उसमें वायु का कोई स्थान नहीं होता, इसलिए उतने ही आयतन में कहीं अधिक द्रव्यमान होता है और उसका घनत्व 1 g/cm³ से ऊपर होता है। जल केवल घनत्व के अनुसार दोनों को छाँट देता है।
क्या आप जानते हैं? किसान शताब्दियों से इसी का उपयोग करते आए हैं। ओसाना इसी कारण से वायु में भूसी को अनाज से अलग करता है, और जल में भूसी को तैराकर हटाना उसी युक्ति का गीला रूप है।