प्र1.
क्या आपने ध्यान दिया है कि घी या तेल के कुछ पैकेटों पर आयतन 1 L चिह्नित होता है परंतु भार केवल 910 ग्राम होता है (चित्र 9.11)? इससे हमें तेल के घनत्व के विषय में क्या ज्ञात होता है? क्या यह जल के घनत्व से कम है या अधिक?
उत्तर
इससे तेल का घनत्व सीधे ज्ञात हो जाता है — और वह जल के घनत्व से कम है।
तेल का आयतन = 1 लीटर = 1000 mL
तेल का द्रव्यमान = 910 g
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
घनत्व = 910 g ÷ 1000 mL
तेल का घनत्व = 0.91 g/mL
जल का घनत्व ≈ 1 g/mL, अतः तेल का आपेक्षिक घनत्व = 0.91 ÷ 1 = 0.91 (कोई मात्रक नहीं)
तेल का द्रव्यमान = 910 g
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
घनत्व = 910 g ÷ 1000 mL
तेल का घनत्व = 0.91 g/mL
जल का घनत्व ≈ 1 g/mL, अतः तेल का आपेक्षिक घनत्व = 0.91 ÷ 1 = 0.91 (कोई मात्रक नहीं)
0.91 g/mL, 1 g/mL से कम है, अतः उतने ही 1 लीटर जल का द्रव्यमान लगभग 1000 g होता जबकि तेल का केवल 910 g है। समान आयतन के लिए तेल हल्का है, इसलिए तेल जल पर तैरता है — ठीक वही जो जल के गिलास में तेल की बूँद डालने पर दिखाई देता है।
ऐसा क्यों होता है: लेबल यह नहीं कह रहा कि पैकेट में तेल कम है। तेल पूरा एक लीटर ही है; बात केवल इतनी है कि तेल प्रत्येक मिलीलीटर में जल की अपेक्षा कम द्रव्यमान भरता है, क्योंकि उसके कण अधिक भारी-भरकम होते हैं और उतने पास-पास नहीं जम सकते। द्रव्यमान और आयतन दो भिन्न राशियाँ हैं, और तैरना-डूबना उनका अनुपात अर्थात घनत्व तय करता है।
स्वयं जाँचिए: दूध के 1 लीटर पैकेट को देखिए। उस पर लगभग 1030 g लिखा मिलेगा, अर्थात एक लीटर जल से कुछ अधिक, क्योंकि दूध में शर्करा, लवण और प्रोटीन घुले रहते हैं। अतः दूध जल में डूबता है और तेल उस पर तैरता है।