सरल अर्थ — (मेरे पिताजी ऐसे हैं कि) मौत के सामने भी हिचकते नहीं, शेर के सामने भी सहमते नहीं। उनकी बोली में बादल की-सी गरज है और उनके काम में आँधी की-सी तेज़ी और थरथराहट है।
| शिल्प का पक्ष | पंक्ति में कैसे काम कर रहा है |
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| अलंकार | अनुप्रास — ‘बोल में बादल’। रूपक/लक्षणा — बोल में बादल का गरजना, काम में झंझा का लरजना। |
| शब्द-संपदा | झंझा = तेज हवा, आँधी-पानी। लरजता/लरजना = काँपना, हिलना-डुलना, दहल जाना। |
| शब्द-युग्म | ‘हिचकें – बिचकें’ जैसे मिलते-जुलते देशज क्रिया-रूपों की जोड़ी। ‘बिचकना’ का अर्थ है डरकर सहम जाना या मुँह बना लेना — बिलकुल बोलचाल का शब्द। |
| संरचना | दो पंक्तियाँ ‘नहीं’ से (न हिचकें, न बिचकें) और दो पंक्तियाँ ‘है’ से — पहले डर का निषेध, फिर शक्ति का विधान। यही संतुलन पिता के व्यक्तित्व को गढ़ता है। |