पहले देखिए कि कवि का अपना परिवार-वृक्ष कविता से किस तरह बनता है — यही आपका आदर्श नमूना है।
| सदस्य | कविता का प्रमाण | व्यक्तित्व |
|---|---|---|
| पिताजी | “पिताजी भोले बहादुर, वज्र-भुज नवनीत-सा उर”; “आज गीता-पाठ करके, दंड दो सौ साठ करके” | बाहर से कठोर, भीतर से मक्खन-सा कोमल; निर्भय, अनुशासित और गहरे वात्सल्य से भरे। |
| माँ | “और माँ बिन-पढ़ी मेरी, दुख में वह गढ़ी मेरी”; “पाँव जो पीछे हटाता, कोख को मेरी लजाता” | अनपढ़ पर सबसे समझदार; स्नेहमयी और अत्यंत दृढ़; पूरे घर को सँभालने वाली। |
| चार भाई | “चार भाई चार बहिनें, भुजा भाई प्यार बहिनें” | घर की ‘भुजा’ यानी बल; खेलते-कूदते, और भाई की याद में ‘पागल’ हो जाने वाले। |
| चार बहनें | “मायके में बहिन आई”; “भाई पागल, बहिन पागल” | घर का ‘प्यार’; मायके आई बहन, जिसे आज उसी घर में परिताप मिला। |
| भौजी | “और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरला” | सहज, कोमल, भावुक — पानी की तरह तरल। |
| सरला | “और भौजी और सरला” | घर की एक और सदस्या, जो भौजी की तरह ही चुपचाप भीतर-भीतर दुख सह रही है। |
| कवि स्वयं (‘पाँचवाँ’) | “पाँचवाँ मैं हूँ अभागा, जिसे सोने पर सुहागा” | पिता का सबसे दुलारा, जो आज जेल में है और अपना दुख छिपाकर घर को धीरज बँधा रहा है। |
- एक बड़ा कागज़ लीजिए। सबसे ऊपर दादा-दादी/नाना-नानी, बीच में माता-पिता, चाचा-चाची, बुआ, और नीचे अपनी पीढ़ी — भाई-बहन, चचेरे-ममेरे भाई-बहन।
- पति-पत्नी को क्षैतिज रेखा से और माता-पिता तथा संतान को खड़ी रेखा से जोड़िए।
- हर नाम के नीचे 2–3 पंक्तियाँ लिखिए — पर केवल गुण मत गिनाइए; कवि की तरह कोई छोटी-सी असली बात लिखिए, जिससे वह व्यक्ति दिखाई देने लगे।
- घर के बुज़ुर्गों से पूछकर एक-दो पुराने नाम और जोड़िए — इससे वृक्ष एक पीढ़ी और ऊपर तक जाएगा।
नमूना उत्तर (दो सदस्यों का विवरण):
दादाजी — उम्र अस्सी के करीब है, पर आज भी सुबह पाँच बजे उठ जाते हैं। बिना छड़ी के मंदिर तक जाते हैं और लौटते समय पड़ोस के हर बच्चे से नाम लेकर बात करते हैं। उन्हें गुस्सा बहुत कम आता है, पर जब कोई झूठ बोलता है तो वे केवल चुप हो जाते हैं — और वह चुप्पी डाँट से ज़्यादा असर करती है।
माँ — माँ स्कूल में पढ़ाती हैं, पर घर में सबसे पहले उठती हैं और सबसे बाद में सोती हैं। उन्हें हिसाब बहुत साफ़ रखना पसंद है; पुरानी कॉपियों तक का हिसाब उनके पास है। जब भी घर में कोई परेशान होता है, वे बिना पूछे उसकी पसंद का खाना बना देती हैं — यही उनका ढाढ़स बँधाने का तरीका है।