गंगा अध्याय 12 खोजबीन

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
• शिक्षक की सहायता से ऐसी किसी अन्य कविता अथवा कहानी के बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए जिसमें घर, परिवार की याद जैसी भावनाएँ चित्रित हों। साथ ही पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से उस रचना को कक्षा में पढ़कर एक संक्षिप्त प्रस्तुति दीजिए।
उत्तर

यह एक पुस्तकालय-परियोजना है। नीचे पहले खोज की दिशा दी गई है, फिर एक पूरा नमूना प्रस्तुतीकरण।

कैसे करें:
  1. शिक्षक से पूछकर दो-तीन रचनाएँ छाँटिए। छोटी रचना चुनिए, ताकि कक्षा में पूरी पढ़ी जा सके।
  2. रचना पढ़कर तीन बातें नोट कीजिए — रचनाकार, कथ्य (क्या कहा गया है), और दो-तीन सबसे अच्छी पंक्तियाँ
  3. प्रस्तुति का ढाँचा रखिए — परिचय → रचना का पाठ → भाव-स्पष्टीकरण → ‘घर की याद’ से तुलना → अपनी राय
  4. प्रस्तुति 4–5 मिनट की रखिए और पाठ करते समय भाव के अनुसार स्वर बदलिए।
रचनारचनाकारकिस तरह की याद
तब याद तुम्हारी आती हैरामनरेश त्रिपाठीइसी पाठ के अंत में ‘साथ-साथ पढ़ें’ में दी गई कविता — प्रकृति के सुंदर क्षणों में ईश्वर की याद।
माँ (कविता) / मातृभूमिमैथिलीशरण गुप्तमाँ और जन्मभूमि के प्रति कृतज्ञता।
तीसरी कसम (कहानी)फणीश्वरनाथ ‘रेणु’गाँव, अपनापन और बिछोह का दर्द।
ईदगाह (कहानी)प्रेमचंददादी अमीना के लिए हामिद का प्रेम — घर के प्रति बच्चे की चिंता।
मेघदूतकालिदासनिर्वासित यक्ष अपनी पत्नी को मेघ के हाथ संदेश भेजता है — ‘घर की याद’ की परंपरा का मूल।
अकाल और उसके बाद / भूखनागार्जुनघर-परिवार के अभावों का यथार्थ चित्र।
माँ का आँचल (संस्मरण)शिवपूजन सहायबचपन, माँ और घर की स्मृतियाँ।

नमूना उत्तर — प्रस्तुति की रूपरेखा (रचना : ‘तीसरी कसम’ — फणीश्वरनाथ ‘रेणु’):

  1. परिचय — फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ आंचलिक कथाकार हैं, यानी वे किसी एक अंचल (क्षेत्र) के जीवन को उसकी अपनी भाषा और अपने रंगों में लिखते हैं। ‘तीसरी कसम’ उनकी सबसे प्रसिद्ध कहानी है।
  2. कथ्य — गाड़ीवान हिरामन नौटंकी की नर्तकी हीराबाई को मेले तक पहुँचाता है। रास्ते के तीन दिनों में उनके बीच एक सहज, नाम-रहित अपनापन बन जाता है। अंत में हीराबाई चली जाती है और हिरामन अकेला रह जाता है।
  3. भाव — कहानी का दुख वही है जो ‘घर की याद’ का है — अपनों से बिछुड़ना। और दोनों जगह वह दुख शोर मचाकर नहीं आता; वह चुपचाप, छोटी-छोटी बातों में आता है।
  4. ‘घर की याद’ से तुलना — रेणु और भवानीप्रसाद मिश्र, दोनों अपने अंचल की भाषा को रचना में बिना झिझक ले आते हैं। जैसे रेणु के यहाँ मैथिली-भोजपुरी के शब्द आते हैं, वैसे ही यहाँ ‘छिन’, ‘भौजी’, ‘बड़’, ‘नद्दी’ आते हैं। दोनों में विरह का स्वर है, पर मिश्र का विरह घर से है और रेणु का एक साथी से।
  5. मेरी राय — ‘घर की याद’ पढ़ने के बाद ‘तीसरी कसम’ पढ़ना अच्छा लगता है, क्योंकि दोनों यह सिखाती हैं कि सबसे गहरा दुख वही होता है जिसे आदमी बोलकर नहीं बता पाता।
प्र2.
• ‘घर की याद’ कविता में कवि सावन के बादलों को दूत बनाकर अपने परिवार के पास संदेश ले जाने का आग्रह करता है। प्रकृति के उपादानों की कल्पना संदेशवाहक के रूप में करने के अनेक उदाहरण साहित्य में मिलते हैं। शिक्षक, पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता से ऐसी कुछ रचनाओं के बारे में पता लगाइए और बताइए कि इनमें प्रकृति के किन उपादानों को संदेशवाहक बनाया गया है?
उत्तर

साहित्य में प्रकृति के किसी उपादान को दूत बनाकर संदेश भेजने की एक पूरी परंपरा है, जिसे दूत-काव्य या संदेश-काव्य कहा जाता है। इसका आरंभ संस्कृत से हुआ और यह हिंदी तक चली आई। कुछ प्रमुख उदाहरण —

रचनारचनाकारभाषा/कालसंदेशवाहक (प्रकृति का उपादान)किसका संदेश किसे
मेघदूतकालिदाससंस्कृतमेघ (बादल)निर्वासित यक्ष अलका नगरी में रहने वाली अपनी पत्नी को। यही पूरी परंपरा का आरंभ माना जाता है।
हंसदूतरूपगोस्वामीसंस्कृतहंसराधा का संदेश श्रीकृष्ण तक।
पवनदूतधोयीसंस्कृतपवन (हवा)प्रेमिका का संदेश राजा तक।
घर की यादभवानीप्रसाद मिश्रहिंदी (आधुनिक काल)सावन का बादल और हवाजेल में बंद कवि का संदेश अपने परिवार तक — “हे सजीले हरे सावन… तुम बरस लो वे न बरसें”; “हवा, उनको धीर देना”।
प्रिय प्रवासअयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’हिंदी (खड़ी बोली)दूत-प्रसंग (उद्धव)कृष्ण का संदेश गोपियों तक; प्रकृति-चित्रण के साथ विरह का वर्णन।
भ्रमरगीत (सूरसागर का अंश)सूरदासब्रजभाषा (भक्तिकाल)भ्रमर (भौंरा)गोपियाँ भौंरे को बहाना बनाकर उद्धव पर व्यंग्य करती हैं — दूत-योजना का अनोखा रूप।
बारहमासा (लोक-परंपरा)लोक-कवि; तुलसी, जायसी आदि में भीअवधी/लोकऋतुएँ, पपीहा, कोयलविरहिणी नायिका अपने प्रिय तक मन की बात पहुँचाना चाहती है।
लोकगीत — ‘कागा सब तन खाइयो’बाबा फ़रीद (लोक-प्रचलित)पंजाबी/लोककौआप्रिय तक अपने अवशेष और संदेश पहुँचाने की कामना।
प्रकृति को ही दूत क्यों बनाया जाता है:
  • वह दोनों जगह मौजूद होती है — जो सावन कवि की जेल पर बरस रहा है, वही उसके घर पर भी बरस रहा है। इसीलिए वह जोड़ने वाली कड़ी बन जाती है।
  • उस पर किसी की रोक नहीं — बादल, हवा और पंछी को न दीवार रोकती है, न पहरा।
  • वह निष्पक्ष और निर्दोष है, इसलिए विरही व्यक्ति उससे मन की बात कहने में झिझकता नहीं।
  • और सबसे बड़ी बात — इससे कवि की विवशता उजागर होती है। आदमी बादल से तभी कहता है जब उसके पास और कोई रास्ता नहीं बचता। ‘घर की याद’ में यही विवशता सबसे मार्मिक है, क्योंकि जिसे संदेश जाना है, उस माँ को तो पढ़ना भी नहीं आता।
प्रस्तुति के लिए सुझाव: दो रचनाएँ चुनकर उनकी तुलना कीजिए — जैसे मेघदूत और ‘घर की याद’। दोनों में दूत बादल ही है, पर मेघदूत में यक्ष अपनी पत्नी को संदेश भेजता है और यहाँ बेटा अपने माता-पिता को; वहाँ संदेश ‘मैं तुम्हें याद करता हूँ’ है, यहाँ संदेश ‘मेरी चिंता मत करना’ है। यही अंतर आपकी प्रस्तुति का सबसे रोचक हिस्सा बनेगा।
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