पहले कविता का ‘घर’ — इस कविता में घर कोई मकान नहीं है। कवि एक बार भी दीवार, छत या कमरे की बात नहीं करता। वह जिसे ‘घर’ कहता है, वह है — चार भाई, चार बहनें, माँ की गोद, पिताजी का मुगदर, भौजी, सरला, और बाड़े में लगा लौकी का बीज। इसीलिए वह लिख पाता है — “घर कि घर में सब जुड़े हैं, सब कि इतने कब जुड़े हैं”। यह एक भरा-पूरा संयुक्त परिवार है, और कविता की सारी पीड़ा इसी से जुड़े होने के कारण है।
| तुलना का आधार | संयुक्त परिवार | एकल परिवार |
|---|---|---|
| सदस्य | दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई, भाई-बहन, भौजी — तीन पीढ़ियाँ एक साथ। | माता-पिता और उनकी संतानें — प्रायः तीन-चार लोग। |
| संकट के समय | दुख बँट जाता है। कविता में भी पिता को माँ सँभाल लेती है और घर टूटने से बच जाता है। | सहारा कम पड़ता है; बाहर से मदद ढूँढ़नी पड़ती है। |
| बच्चों का पालन | दादी-नानी की कहानियाँ, कई भाई-बहन, साझा करना अपने आप सीख जाते हैं। | माता-पिता का पूरा ध्यान मिलता है, पर बच्चा प्रायः अकेला बड़ा होता है। |
| निर्णय | बड़ों की सलाह मिलती है, पर व्यक्ति की अपनी पसंद दब भी सकती है। | निर्णय जल्दी होते हैं और अपनी इच्छा से होते हैं। |
| खर्च | रसोई, मकान और सामान साझा — खर्च कम। | हर चीज़ अलग — खर्च अधिक। |
| निजता (प्राइवेसी) | कम; हर बात सबकी बात बन जाती है। | अधिक; अपनी जगह और अपना समय मिलता है। |
| बुज़ुर्गों की स्थिति | घर में ही देखभाल और सम्मान मिलता है। | प्रायः अकेले रह जाते हैं — आज का सबसे बड़ा सामाजिक प्रश्न। |
नमूना उत्तर (मेरी पसंद-नापसंद, कारण सहित):
संयुक्त परिवार में मुझे जो पसंद है — सबसे पहले यह कि वहाँ कोई अकेला नहीं पड़ता। बीमारी, परीक्षा, विवाह या मृत्यु — किसी भी अवसर पर आठ-दस हाथ अपने आप उठ जाते हैं। दूसरा, बच्चों को बाँटना और सहना किताब से नहीं, रोज़ के जीवन से आता है। तीसरा, दादा-दादी के पास बैठकर जो भाषा, कहावतें और कहानियाँ मिलती हैं, वे किसी कक्षा में नहीं मिलतीं — इसी कविता की भाषा (‘छिन’, ‘भौजी’, ‘बड़’) भी ऐसे ही घर की देन है।
संयुक्त परिवार में मुझे जो नापसंद है — कभी-कभी व्यक्ति की अपनी इच्छा दब जाती है; पढ़ाई या करियर का निर्णय ‘घर के हिसाब से’ लेना पड़ता है। पढ़ने या एकांत में सोचने की जगह कम मिलती है। और यदि आपस में मतभेद हो जाए तो पूरा घर उसमें उलझ जाता है।
एकल परिवार में मुझे जो पसंद है — निर्णय की स्वतंत्रता, अपनी जगह और अपना समय। माता-पिता का पूरा ध्यान मिलता है, और जीवन आसानी से एक शहर से दूसरे शहर ले जाया जा सकता है — आज की नौकरियों के लिए यह ज़रूरी भी है।
एकल परिवार में मुझे जो नापसंद है — संकट के समय अकेलापन; बुज़ुर्गों का पीछे छूट जाना; और बच्चों में साझा करने की आदत का कम पड़ना।