प्र1.
“जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीता-रहस्य’ से हटकर मिट्ठू के पंखों की ‘फड़फड़ाहट’ पर गया।” पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि ‘फड़फड़ाहट’ कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
उत्तर
जो शब्द किसी ध्वनि की नकल करके बने हों, उन्हें ध्वन्यात्मक या अनुकरणात्मक शब्द कहते हैं। इनकी खूबी यह है कि पढ़ते ही आवाज सुनाई देने लगती है — इसीलिए ये वर्णन को जीवंत बना देते हैं।
पहले इसी पाठ से — ‘फड़फड़ाहट’ के अतिरिक्त कहानी में मिलते हैं — भाँय-भाँय (सूने घर की गूँज), चहचहाना (“पेड़ों में चिड़ियाँ चहचहातीं”), टुकुर-टुकुर (एकटक ताकने का भाव)।
| ध्वन्यात्मक शब्द | किसकी ध्वनि | नया वाक्य |
|---|---|---|
| फड़फड़ाहट | पंखों के हिलने की | कबूतरों की फड़फड़ाहट सुनकर बिल्ली भाग खड़ी हुई। |
| सरसराहट | पत्तों के हिलने की | रात में बाँस के झुरमुट से आती सरसराहट डरा रही थी। |
| गड़गड़ाहट | बादलों के गरजने की | बादलों की गड़गड़ाहट सुनते ही बच्चे भीतर भागे। |
| खटखटाहट | दरवाजा पीटने की | देर रात दरवाजे की खटखटाहट से सब जाग गए। |
| झनझनाहट | धातु के बजने की | बर्तन गिरने की झनझनाहट पूरे घर में गूँज गई। |
| कलकल | बहते पानी की | पहाड़ी नदी कलकल करती हुई नीचे उतर रही थी। |
| टपटप | बूँदों के गिरने की | छत से टपटप पानी टपक रहा था। |
| भनभनाना | मक्खी-मधुमक्खी की | गुड़ की भेली पर मक्खियाँ भनभना रही थीं। |
| हिनहिनाना | घोड़े की | अस्तबल में घोड़ा जोर से हिनहिनाया। |
| टर्र-टर्र | मेंढक की | बारिश की पहली रात तालाब में टर्र-टर्र मच गई। |
| खनखनाना | सिक्कों की | जेब में सिक्के खनखना रहे थे। |
| चरमराहट | लकड़ी/झूले के दबने की | पुराने पलंग की चरमराहट रात भर सुनाई देती रही। |
| गुर्राना | कुत्ते-शेर की | अनजान आदमी को देखकर कुत्ता गुर्राने लगा। |
| चटचटाना | जलती लकड़ी की | चूल्हे में लकड़ियाँ चटचटा रही थीं। |
क्यों लेखक ने यही शब्द चुना: ‘फड़फड़ाहट’ इस प्रसंग का निर्णायक शब्द है। जगन मास्टर ‘गीता-रहस्य’ में डूबे थे — यानी आदर्श और दर्शन में। उन्हें उससे बाहर एक ध्वनि खींच लाती है। पूरी दुर्घटना की सूचना लेखक ने किसी वाक्य से नहीं, एक ध्वनि से दी है।