गंगा अध्याय 3 ध्वन्यात्मकता शब्दों से

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीता-रहस्य’ से हटकर मिट्ठू के पंखों की ‘फड़फड़ाहट’ पर गया।” पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि ‘फड़फड़ाहट’ कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
उत्तर

जो शब्द किसी ध्वनि की नकल करके बने हों, उन्हें ध्वन्यात्मक या अनुकरणात्मक शब्द कहते हैं। इनकी खूबी यह है कि पढ़ते ही आवाज सुनाई देने लगती है — इसीलिए ये वर्णन को जीवंत बना देते हैं।

पहले इसी पाठ से — ‘फड़फड़ाहट’ के अतिरिक्त कहानी में मिलते हैं — भाँय-भाँय (सूने घर की गूँज), चहचहाना (“पेड़ों में चिड़ियाँ चहचहातीं”), टुकुर-टुकुर (एकटक ताकने का भाव)।

ध्वन्यात्मक शब्दकिसकी ध्वनिनया वाक्य
फड़फड़ाहटपंखों के हिलने कीकबूतरों की फड़फड़ाहट सुनकर बिल्ली भाग खड़ी हुई।
सरसराहटपत्तों के हिलने कीरात में बाँस के झुरमुट से आती सरसराहट डरा रही थी।
गड़गड़ाहटबादलों के गरजने कीबादलों की गड़गड़ाहट सुनते ही बच्चे भीतर भागे।
खटखटाहटदरवाजा पीटने कीदेर रात दरवाजे की खटखटाहट से सब जाग गए।
झनझनाहटधातु के बजने कीबर्तन गिरने की झनझनाहट पूरे घर में गूँज गई।
कलकलबहते पानी कीपहाड़ी नदी कलकल करती हुई नीचे उतर रही थी।
टपटपबूँदों के गिरने कीछत से टपटप पानी टपक रहा था।
भनभनानामक्खी-मधुमक्खी कीगुड़ की भेली पर मक्खियाँ भनभना रही थीं।
हिनहिनानाघोड़े कीअस्तबल में घोड़ा जोर से हिनहिनाया।
टर्र-टर्रमेंढक कीबारिश की पहली रात तालाब में टर्र-टर्र मच गई।
खनखनानासिक्कों कीजेब में सिक्के खनखना रहे थे।
चरमराहटलकड़ी/झूले के दबने कीपुराने पलंग की चरमराहट रात भर सुनाई देती रही।
गुर्रानाकुत्ते-शेर कीअनजान आदमी को देखकर कुत्ता गुर्राने लगा।
चटचटानाजलती लकड़ी कीचूल्हे में लकड़ियाँ चटचटा रही थीं।
क्यों लेखक ने यही शब्द चुना: ‘फड़फड़ाहट’ इस प्रसंग का निर्णायक शब्द है। जगन मास्टर ‘गीता-रहस्य’ में डूबे थे — यानी आदर्श और दर्शन में। उन्हें उससे बाहर एक ध्वनि खींच लाती है। पूरी दुर्घटना की सूचना लेखक ने किसी वाक्य से नहीं, एक ध्वनि से दी है।
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