प्र1.
‘मिट्ठू’ शब्द का अर्थ होता है— मधुरभाषी, मीठा बोलनेवाला या तोता। यह शब्द इतना अधिक प्रचलित है कि इसका प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है— ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना’ जिसका अर्थ है ‘अपनी प्रशंसा आप करना’ या ‘अपने मुँह से अपनी बड़ाई करना’। आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे नीचे लिखे इस वाक्य में है— “अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”
उत्तर
पहले पाठ का ही मुहावरा समझ लीजिए — “हाथों के तोते उड़ जाना” का अर्थ है घबरा जाना, होश उड़ जाना, सन्न रह जाना। लेखक ने यहाँ शब्दों का दुहरा खेल किया है — मिट्ठू सचमुच उड़ा, और उसी के साथ जगन मास्टर के ‘हाथों के तोते’ भी उड़ गए। इसी को श्लेष जैसा प्रभाव कहते हैं।
जीव-जंतुओं वाले कुछ प्रचलित मुहावरे —
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|
| हाथों के तोते उड़ जाना | घबरा जाना, होश उड़ जाना | परीक्षा का पर्चा देखते ही मोहन के हाथों के तोते उड़ गए। |
| गधे को बाप बनाना | स्वार्थ के लिए मूर्ख की भी खुशामद करना | काम निकालने के लिए वह गधे को भी बाप बना लेता है। |
| बिल्ली के भाग्य से छींका टूटना | बिना मेहनत अचानक लाभ मिल जाना | उसे यह नौकरी बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने जैसी मिली। |
| ऊँट के मुँह में जीरा | आवश्यकता की तुलना में बहुत कम | इतने बड़े परिवार के लिए दो रोटियाँ ऊँट के मुँह में जीरा हैं। |
| साँप-छछूँदर की गति होना | दोनों ओर से मुश्किल में फँस जाना | गनपत की हालत साँप-छछूँदर जैसी थी — सच बताएँ तो मुसीबत, छिपाएँ तो मुसीबत। |
| चींटी के पर निकलना | घमंड में विनाश को न्योता देना | थोड़ी-सी सफलता क्या मिली, उसके तो चींटी के पर निकल आए। |
| घोड़े बेचकर सोना | निश्चिंत होकर गहरी नींद सोना | परीक्षा खत्म होते ही वह घोड़े बेचकर सो गया। |
| मगरमच्छ के आँसू बहाना | झूठा दुख दिखाना | नुकसान करके अब वह मगरमच्छ के आँसू बहा रहा है। |
| बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी | संकट अंततः आकर ही रहेगा | झूठ पकड़ा ही जाएगा — बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी। |
| कौआ चला हंस की चाल | अपनी प्रकृति छोड़कर दूसरे की नकल करना | अपनी बोली छोड़कर वह कौआ चला हंस की चाल वाली दशा में है। |
| दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है | एक बार धोखा खाकर अत्यधिक सतर्क हो जाना | एक बार ठगे जाने के बाद वह दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है। |
| अंधों में काना राजा | अयोग्य लोगों के बीच थोड़ा योग्य भी बड़ा लगे | उस टीम में वह अंधों में काना राजा है। |
| मुर्गे की बाँग से सवेरा नहीं होता | किसी एक के न होने से काम नहीं रुकता | वह चला भी गया तो क्या — मुर्गे की बाँग से सवेरा नहीं होता। |
| शेर के मुँह में हाथ डालना | बहुत बड़ा खतरा मोल लेना | बिना तैयारी उस प्रतियोगिता में जाना शेर के मुँह में हाथ डालना है। |
| चिड़िया का दूध | असंभव वस्तु | वह ऐसी शर्त रख रहा है मानो चिड़िया का दूध माँग रहा हो। |
अभ्यास: इनमें से कोई पाँच चुनकर अपनी कॉपी में अपने वाक्य बनाइए। मुहावरा तभी सधता है जब वाक्य में उसका अर्थ अपने आप खुल जाए — अर्थ अलग से बताना न पड़े।