गंगा अध्याय 3 शब्द-युग्म

अद्यतन2026-09-06

प्र1.
“अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं।” — वे शब्द जो जोड़े में लिखे जाते हैं, उन्हें शब्द-युग्म कहा जाता है। शब्द-युग्म मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं— पुनरुक्त (बार-बार), सजातीय (उठना-बैठना), समानार्थक (दिन-प्रतिदिन), विपरीतार्थक (दिन-रात)। इन प्रकारों को पाठ से उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर

शब्द-युग्म दो शब्दों को जोड़कर बनता है और उसका भाव किसी एक शब्द से अधिक होता है। पुस्तक ने चार प्रकार बताए हैं — नीचे हर प्रकार के लिए इसी पाठ से उदाहरण दिए गए हैं।

प्रकारपहचानपुस्तक का उदाहरण‘संवादहीन’ पाठ से उदाहरण
पुनरुक्तएक ही शब्द दो बार आएबार-बारधीरे-धीरे, भाँय-भाँय, टुकुर-टुकुर, पसीना-पसीना, नए-नए, अपने-अपने, छोटी-छोटी
सजातीयएक ही वर्ग/क्षेत्र के दो अलग शब्दउठना-बैठनाखेती-बाड़ी, चौका-चूल्हा, तीज-त्योहार, गाय-ढोर, नौकर-चाकर, खेल-तमाशे
समानार्थकदोनों शब्दों का अर्थ लगभग एकदिन-प्रतिदिनशादी-ब्याह (ब्याह-शादियाँ), मेले-ठेले, भीड़-भाड़, न्यौते-बुलावे, सूरत-शक्ल, मान-मनौवल, नियम-सिद्धांत
विपरीतार्थकदोनों शब्दों का अर्थ उलटादिन-रातवक्त-बेवक्त, रात-दिन (“वह रात-दिन मिट्ठू को लेकर ही बेचैन रहने लगीं”), मौके बे-मौके, ऊँच-नीच, बहू-बेटे
पहचान का सूत्र: दूसरे शब्द को हटाकर देखिए। यदि अर्थ ज्यों का त्यों रहे — समानार्थक; यदि अर्थ उलट जाए — विपरीतार्थक; यदि पहला ही शब्द दुहराया गया हो — पुनरुक्त; और यदि दोनों अलग पर एक ही परिवार के हों — सजातीय।
प्र2.
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए— वक्त-बेवक्त, नियम-सिद्धांत, शादी-ब्याह, तीज-त्योहार।
उत्तर
शब्द-युग्मप्रकारअर्थपाठ में कहाँअपना वाक्य
वक्त-बेवक्तविपरीतार्थकसमय-असमय; जब-तब, बिना किसी नियत समय के“मिट्ठू के वक्त-बेवक्त के तकाजों के लिए रोटी बचाकर रखतीं।”छोटे बच्चे वक्त-बेवक्त भूख लगने पर रोने लगते हैं।
नियम-सिद्धांतसमानार्थकजीवन जीने के बनाए हुए उसूल और आदर्श“उन्होंने अपने कुछ नियम-सिद्धांत बना रखे थे…”गांधीजी अपने नियम-सिद्धांतों से कभी नहीं डिगे।
शादी-ब्याहसमानार्थकविवाह और उससे जुड़े सारे मांगलिक आयोजन“वे ब्याह-शादियाँ, तीज-त्योहार, जन्म और मृत्यु-पर्व…”जेठ के महीने में गाँव में शादी-ब्याह की धूम रहती है।
तीज-त्योहारसजातीयव्रत, पर्व और उत्सव — सभी मांगलिक अवसर“वे ब्याह-शादियाँ, तीज-त्योहार…”तीज-त्योहार पर ही अब बिखरा हुआ परिवार एक जगह जुटता है।
ध्यान दीजिए: कहानी में ये चारों शब्द-युग्म उस प्रसंग में आते हैं जहाँ बड़े घर का बीता हुआ वैभव याद किया जा रहा है। यानी ये केवल शब्द नहीं — ये उस भरे-पूरे जीवन के चिह्न हैं जो अब नहीं रहा। एक शब्द-युग्म भी कहानी का भाव उठाए चलता है, यही अच्छी भाषा की पहचान है।
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