प्र1.
“अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं।” — वे शब्द जो जोड़े में लिखे जाते हैं, उन्हें शब्द-युग्म कहा जाता है। शब्द-युग्म मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं— पुनरुक्त (बार-बार), सजातीय (उठना-बैठना), समानार्थक (दिन-प्रतिदिन), विपरीतार्थक (दिन-रात)। इन प्रकारों को पाठ से उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
शब्द-युग्म दो शब्दों को जोड़कर बनता है और उसका भाव किसी एक शब्द से अधिक होता है। पुस्तक ने चार प्रकार बताए हैं — नीचे हर प्रकार के लिए इसी पाठ से उदाहरण दिए गए हैं।
| प्रकार | पहचान | पुस्तक का उदाहरण | ‘संवादहीन’ पाठ से उदाहरण |
|---|---|---|---|
| पुनरुक्त | एक ही शब्द दो बार आए | बार-बार | धीरे-धीरे, भाँय-भाँय, टुकुर-टुकुर, पसीना-पसीना, नए-नए, अपने-अपने, छोटी-छोटी |
| सजातीय | एक ही वर्ग/क्षेत्र के दो अलग शब्द | उठना-बैठना | खेती-बाड़ी, चौका-चूल्हा, तीज-त्योहार, गाय-ढोर, नौकर-चाकर, खेल-तमाशे |
| समानार्थक | दोनों शब्दों का अर्थ लगभग एक | दिन-प्रतिदिन | शादी-ब्याह (ब्याह-शादियाँ), मेले-ठेले, भीड़-भाड़, न्यौते-बुलावे, सूरत-शक्ल, मान-मनौवल, नियम-सिद्धांत |
| विपरीतार्थक | दोनों शब्दों का अर्थ उलटा | दिन-रात | वक्त-बेवक्त, रात-दिन (“वह रात-दिन मिट्ठू को लेकर ही बेचैन रहने लगीं”), मौके बे-मौके, ऊँच-नीच, बहू-बेटे |
पहचान का सूत्र: दूसरे शब्द को हटाकर देखिए। यदि अर्थ ज्यों का त्यों रहे — समानार्थक; यदि अर्थ उलट जाए — विपरीतार्थक; यदि पहला ही शब्द दुहराया गया हो — पुनरुक्त; और यदि दोनों अलग पर एक ही परिवार के हों — सजातीय।