उत्तर — ढीली (“ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए…”)।
‘तंग’ का अर्थ है कसा हुआ, सँकरा; और ‘ढीला’ का अर्थ है जो कसा हुआ न हो। इसलिए ये दोनों विपरीतार्थक (विलोम) शब्द हैं।
अद्यतन2026-09-06
उत्तर — ढीली (“ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए…”)।
‘तंग’ का अर्थ है कसा हुआ, सँकरा; और ‘ढीला’ का अर्थ है जो कसा हुआ न हो। इसलिए ये दोनों विपरीतार्थक (विलोम) शब्द हैं।
उत्तर — “पसीना-पसीना होना” (“…पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे”)।
अर्थ — बहुत परेशान या हैरान हो जाना; दौड़-धूप और घबराहट से बेहाल हो जाना। यह मुहावरा है, क्योंकि इसका अर्थ शब्दों के सीधे अर्थ से नहीं निकलता — यहाँ केवल पसीना आना नहीं, हड़बड़ी और लाचारी का भाव है।
इसी अनुच्छेद में एक और मुहावरा भी है — “पंख तौलना” (“अपने पंख तौलने में मशगूल रहे”), जिसका अर्थ है — अपनी शक्ति या सामर्थ्य आँकना, उड़ान का अभ्यास करना।
| मुहावरा | अर्थ | अपना वाक्य |
|---|---|---|
| पसीना-पसीना होना | घबराहट और भाग-दौड़ से बेहाल होना | भीड़ में खोए बच्चे को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते पिता पसीना-पसीना हो गए। |
| पंख तौलना | अपनी सामर्थ्य आँकना, उड़ान भरने की तैयारी करना | दसवीं पास करते ही वह अपने पंख तौलने लगा। |
उत्तर — पुकारते (“‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए…”)।
जिस शब्द से किसी काम का होना या करना जाना जाए, वह क्रिया है। ‘पुकारना’ एक काम है, इसलिए यह क्रिया है।
इसी अनुच्छेद की अन्य क्रियाएँ — सँभालते, होते रहे, तौलने, रहे, आ (‘आ!’ आज्ञार्थक क्रिया)।
उत्तर — धोती (जातिवाचक संज्ञा)।
किसी वस्तु, व्यक्ति, स्थान, प्राणी या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं।
| अनुच्छेद की संज्ञाएँ | भेद |
|---|---|
| मिट्ठू | व्यक्तिवाचक संज्ञा (एक विशेष तोते का नाम) |
| धोती, बाग, पेड़, डाल, हाथ, पंख, पसीना | जातिवाचक संज्ञा |
उत्तर — वह (“…वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास … पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे”)।
संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द को सर्वनाम कहते हैं। यहाँ ‘वह’ जगन मास्टर के स्थान पर आया है, इसलिए यह पुरुषवाचक सर्वनाम (अन्य पुरुष) है।
अनुच्छेद में ‘अपने’ (“अपने पंख तौलने में”) भी सर्वनाम है — यह निजवाचक सर्वनाम है।
उत्तर — ढीली (“ढीली धोती”)।
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताए, वह विशेषण है। यहाँ ‘ढीली’ धोती की दशा बता रहा है, इसलिए यह गुणवाचक विशेषण है; और ‘धोती’ इसका विशेष्य है।
अन्य विशेषण — ‘एक’ और ‘दूसरे/दूसरी’ (“एक पेड़ से दूसरे पेड़”, “एक डाल से दूसरी डाल”) — ये संख्यावाचक विशेषण हैं।
उत्तर — ‘से’ (“दोनों हाथों से सँभालते हुए”, “एक पेड़ से दूसरे पेड़”)।
संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध बताने वाले चिह्न (परसर्ग) को कारक-चिह्न कहते हैं।
| अनुच्छेद का अंश | चिह्न | कारक |
|---|---|---|
| दोनों हाथों से सँभालते हुए | से | करण कारक (साधन बताता है) |
| एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास | से | अपादान कारक (अलग होने का भाव) |
| बाग में, पंख तौलने में | में | अधिकरण कारक (स्थान/आधार) |
| दूसरी डाल पर, दूसरे पेड़ पर | पर | अधिकरण कारक |
| ढीली धोती को | को | कर्म कारक |
उत्तर — वह (अर्थात जगन मास्टर) — “…वह बाग में … पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे।”
जो क्रिया करता है, वही कर्ता कहलाता है। यहाँ पुकारने और पसीना-पसीना होने का काम ‘वह’ (जगन मास्टर) कर रहा है।
इसी अनुच्छेद के दूसरे भाग का कर्ता मिट्ठू है — “और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर … अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।”