मूक अभिनय (माइम) में शब्द नहीं होते — भाव केवल चेहरे, हाथ, चाल और शरीर की मुद्रा से दिखाना होता है। इसलिए पहले तय कीजिए कि हर भाव का कौन-सा दृश्य लिया जाए और उसमें कौन-सा शारीरिक संकेत उस भाव को खोलेगा।
| भाव | कहानी का दृश्य | मूक अभिनय में क्या दिखाएँ |
|---|---|---|
| दुख | ताई कुंभ से लौटकर एवजी तोते के सामने खड़ी हैं | झुके कंधे, धीमे कदम, पिंजरे की ओर बढ़ता काँपता हाथ; फिर ठिठकना, पीछे हटना और खाली आँखों से चारों ओर देखना। मंच पर एक ही व्यक्ति और एक खाली पिंजरा — अकेलेपन के लिए खाली जगह छोड़िए। |
| स्नेह | ताई मिट्ठू को दाल-भात खिला रही हैं, वह आशीष दे रही हैं | झुककर कटोरी रखना, धीरे से सिर सहलाने का संकेत, मुस्कान, दोनों हाथ उठाकर आशीर्वाद की मुद्रा; तोता बना बच्चा गर्दन टेढ़ी करके देखे और सिर हिलाए। |
| आजादी | मिट्ठू का रोशनदान से उड़ जाना | पहले सिकुड़कर बैठना (पिंजरा), फिर सिर उठाकर ऊपर देखना, धीरे-धीरे बाँहें फैलाना और मंच पर घूमते हुए ऊँचा उठना। पीछे जगन मास्टर दौड़ते हुए, धोती सँभालते हुए, माथे का पसीना पोंछते हुए। |